हाथरस में इंसानियत शर्मसार, धर्म परिवर्तन के शक में पिता-भाई ने ही बेटे-बहू को पहनाई जूतों की माला, पूरे गांव में घुमाया

हाथरस के गौरवगढ़ी गांव में धर्म परिवर्तन के शक में एक पिता और भाई ने अपने ही बेटे-बहू को जूतों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

हाथरस
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राजेश सिंघल

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उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सभ्य समाज की सोच पर गहरा प्रहार किया है. यहां के गौरवगढ़ी गांव में मात्र एक शक के आधार पर एक पिता और भाई ने अपने ही परिवार के बेटे और बहू के साथ वह सलूक किया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. धर्म परिवर्तन के संदेह में इस दंपति को न केवल सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, बल्कि जूतों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया गया.

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शक ने छीनी अपनों की ममता

जानकारी के अनुसार, गांव का एक युवक आगरा में झूला झुलाने का काम करता था. होली के त्यौहार पर वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव वापस आया था. बताया जा रहा है कि युवक के रहन-सहन और हाव-भाव को देखकर उसके परिवार वालों को शक हुआ कि उसने धर्म परिवर्तन कर लिया है. इस संदेह ने देखते ही देखते नफरत का रूप ले लिया और घर की चारदीवारी की बात पंचायत तक जा पहुंची.

पंचायत में हुआ गरिमा का हनन

आमतौर पर पंचायतें विवाद सुलझाने के लिए बुलाई जाती हैं, लेकिन गौरवगढ़ी की इस पंचायत में इंसानियत को तार-तार करने वाला फैसला लिया गया. युवक के पिता और भाई ने खुद आगे बढ़कर बेटे और बहू को जूतों की माला पहनाई. इसके बाद पूरे गांव में उन्हें घुमाकर बेइज्जत किया गया. घटना के दौरान वहां मौजूद भीड़ मूकदर्शक बनी रही और किसी ने भी कानून हाथ में लेने वालों को नहीं रोका.

वीडियो वायरल होने पर पुलिस का एक्शन

इस शर्मनाक घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. डीएसपी योगेंद्र कृष्ण ने बताया कि 20 अप्रैल को वीडियो सामने आने के बाद थाना प्रभारी मुरशान के साथ मौके का निरीक्षण किया गया. पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पिता और भाई ने पारिवारिक और सामाजिक विवाद के चलते इस कृत्य को अंजाम दिया है. पुलिस अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है.

समाज और सिस्टम पर सवाल

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़ी करती है. क्या महज किसी अफवाह या शक के आधार पर किसी व्यक्ति की गरिमा छीनने का अधिकार किसी को है? क्या आज भी पंचायतें देश के संविधान और कानून से ऊपर हैं? हाथरस की यह घटना चेतावनी है कि अगर भीड़ मानसिकता और ऐसी संकीर्ण सोच पर लगाम नहीं लगाई गई, तो समाज में नफरत की जड़ें और गहरी हो जाएंगी.

 

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