क्या राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश ने मचाई सियासी हलचल! पूरा केस समझिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता के मामले में एफआईआर दर्ज करने और केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया है. बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

rahul gandhi
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संतोष शर्मा

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ 'दोहरी नागरिकता' मामले में एफआईआर दर्ज करने का बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने का भी निर्देश दिया है. 

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क्या है नागरिकता से जुड़ा विवाद?

यह पूरा विवाद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर है. कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने याचिका दायर कर दावा किया है कि राहुल गांधी ने भारतीय नागरिक होते हुए ब्रिटेन की नागरिकता हासिल की थी.

भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता. यदि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता थी या है, तो भारत में उनका चुनाव लड़ना और सांसद बनना गैर-कानूनी हो सकता है.

बैकऑप्स लिमिटेड और 'राउल विंची' का कनेक्शन

याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर का आरोप है कि राहुल गांधी ने साल 2003 में लंदन में 'Backops Limited' नाम की एक कंपनी बनाई थी. इस कंपनी के दस्तावेजों में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था. इतना ही नहीं, याचिका में दावा किया गया है कि कुछ दस्तावेजों में उनका नाम 'राउल विंची' (Raul Vinci) दर्ज है. इन दावों की पुष्टि के लिए बैंक स्टेटमेंट और यात्रा संबंधी रिकॉर्ड भी कोर्ट के समक्ष पेश किए गए हैं.

केस की पूरी टाइमलाइन

इस मामले की कानूनी लड़ाई काफी लंबी रही है. विग्नेश शिशिर ने सबसे पहले जुलाई 2025 में रायबरेली पुलिस को एफआईआर के लिए अर्जी दी थी. जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो वे एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचे.

जनवरी 2026 में लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय से राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी गोपनीय फाइल तलब की थी. लंबी सुनवाई के बाद 17 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया.

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब रायबरेली पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी होगी. इसके बाद केंद्रीय एजेंसी (जैसे सीबीआई या एफआईए) इस मामले की गहराई से जांच करेगी कि क्या वाकई राहुल गांधी ने विदेशी नागरिकता ली थी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर संकट आ सकता है और उन्हें कानूनी सजा भी हो सकती है. फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में इस फैसले के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

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