Jantar Mantar Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का विरोध-प्रदर्शन एक बार फिर तेज हो गया है. बीते दिनों संसद मार्च के दौरान पुलिस प्रशासन के साथ हुई धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला डगमगाया नहीं है. भारी सुरक्षा बलों और बैरिकेडिंग की तैनाती के बीच छात्र दोबारा एकजुट होकर सरकार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.
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UP Tak की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर पहुंचीं छात्राओं ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उत्तर प्रदेश से आईं कोमल और वेस्ट दिल्ली की निशा समेत कई छात्राओं ने कल के वाकये को याद करते हुए बताया कि जब प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक तरीके से संसद की तरफ बढ़ रहे थे तो पुलिस ने उन्हें जगह-जगह बैरिकेड लगाकर रोक दिया.
छात्राओं का आरोप है कि पुलिस बल ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की खींचतान की और लाठीचार्ज किया. एक छात्रा सिमरन ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, "पुलिस ने मदद करने के बजाय छात्रों को बेरहमी से घसीटा. हमारे कपड़े तक फाड़े गए और पैरों से कुचला गया. हम कोई आतंकवादी या मर्डरर नहीं हैं, हम सिर्फ अपने हक के लिए पढ़ाई और शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं."
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा. छात्रों का कहना है कि वे किसी तरह की हिंसा या पत्थरबाजी में शामिल नहीं हैं और केवल अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं.
हक के लिए लड़ेंगे, पीछे नहीं हटेंगे
हाथों में पोस्टर और बैनर लिए युवाओं का कहना है कि अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता. एक अन्य छात्रा ने कहा, "अगर किसी को लगता है कि डरा-धमकाकर या लाठियां चलाकर हमें हटा दिया जाएगा, तो वे गलतफहमी में हैं. हम अकेले आए हैं और हक लेकर ही यहां से जाएंगे." फिलहाल जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है, लेकिन छात्रों का जोश और नारेबाजी लगातार जारी है.
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