जंतर-मंतर हिंसा 'सच या साजिश'? संसद मार्च के दौरान उपद्रव से लेकर पाकिस्तानी एंगल तक, जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

न्यूज तक डेस्क

• 03:51 PM • 21 Jul 2026

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन और NEET परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में निकाला गया संसद मार्च हिंसक झड़प में बदल गया.

जंतर मंतर प्रोटेस्ट
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संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई 2026 को राजधानी दिल्ली की सड़कें भीषण तनाव, झड़प और उपद्रव की गवाह बनीं. सोनम वांगचुक के समर्थकों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए. प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच हुए टकराव में लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, बैरिकेडिंग तोड़े जाने और पथराव की घटनाएं सामने आईं. अब इस पूरी घटना को लेकर दिल्ली पुलिस गहन जांच में जुट गई है कि क्या यह महज एक अचानक भड़का विरोध प्रदर्शन था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश रची गई थी.

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कैसे शुरू हुआ विवाद? 

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 28 जून से हुई थी जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे. 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था. हालांकि, अस्पताल जाने से पहले उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की अपील की थी. 20 जुलाई की सुबह हजारों की संख्या में समर्थक, छात्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए. CJP की मुख्य मांग NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी.

प्रदर्शन से हिंसा तक का घटनाक्रम

बैरिकेडिंग तोड़ना: भारी बारिश के बावजूद भीड़ संसद की तरफ बढ़ने लगी. पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ने की कोशिश की.

इन इलाकों में बिगड़े हालात: सेंट्रल दिल्ली, कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास माहौल अचानक हिंसक हो गया.

लाठीचार्ज व आंसू गैस: स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. कुछ संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं.

तोड़फोड़ व पथराव: पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और दिल्ली पुलिस की दो बसों पर पथराव कर शीशे तोड़ दिए. वहीं जनपथ इलाके में दुकानों में तोड़फोड़ की गई.

50 से अधिक जवान घायल, 70 से ज्यादा हिरासत में

इस हिंसक झड़प में सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा है:

  • घायल जवान: दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 से ज्यादा जवान घायल हुए हैं, जिनमें 5 से अधिक IPS अधिकारी भी शामिल हैं.
  • हिरासत: दिन खत्म होने तक दिल्ली पुलिस ने 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं.

सोशल मीडिया जांच और पाकिस्तानी हैंडल्स का शक

दिल्ली पुलिस अब घटना के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मोबाइल वीडियो खंगाल रही है. इसके साथ ही हिंसा फैलाने में अफवाहों और सोशल मीडिया की भूमिका की जांच की जा रही है.

फेक न्यूज और उकसावा: पुलिस का दावा है कि पाकिस्तान से संचालित कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही थी.

फर्जी आंकड़े: सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया था कि हिंसा में 7 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, 391 घायल हुए और 250 गिरफ्तार हुए. दिल्ली पुलिस ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज और झूठा करार दिया है.