ITBP जवान की मां के साथ ऐसा क्या हुआ कि हथियारों से लैस ITBP 50 से ज्यादा जवान पहुंचे कानपुर कमिश्नर ऑफिस, जानें पूरा मामला

Kanpur News: कानपुर में एक आईटीबीपी जवान की मां के इलाज में हुई लापरवाही ने अब बड़ा रूप ले लिया है. जांच रिपोर्ट से नाराज 50 से ज्यादा हथियारबंद ITBP जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. जवानों ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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सिमर चावला

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Kanpur ITBP soldier News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में शनिवार की सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया. देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले ITBP के 50 से अधिक हथियारबंद जवान अचानक कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. इतनी संख्या में जवानों के वहां पहुंचने पर पूरा परिसर देखते ही देखते छावनी में तब्दील हो गया. बताया जा रहा है कि यहां जवान किसी सुरक्षा ड्यूटी के लिए नहीं, बल्कि अपने ही एक साथी की जवान की मदद के लिए  पहुंचे थे.

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सबसे पहले जानिए क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला महाराजपुर की 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी से जुड़ा हुआ है. दरअसल, 13 मई को उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने के बाद रामादेवी स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों द्वारा घोर लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से महिला के हाथ में एक गंभीर संक्रमण फैल गया. मरीज की हालत बिगड़ती देख उन्हें आनन-फानन में पारस हॉस्पिटल ले जाया गया. यहां डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए 17 मई को उनका हाथ काटकर शरीर से अलग करना पड़ा.

कटा हुआ हाथ लेकर दफ्तर पहुंचे थे जवान

अपनी मां के साथ हुई इस खौफनाक लापरवाही के बाद जवान विकास सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. न्याय न मिलने पर 20 मई को वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर खुद पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंच गए थे. इस घटना के बाद पुलिस आयुक्त ने पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग को सौंपी थी. लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जो जांच रिपोर्ट सामने आई, उसने पीड़ित परिवार और आईटीबीपी के अधिकारियों के सब्र का बांध तोड़ दिया.

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

शनिवार सुबह आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और लाइसनिंग ऑफिसर अर्पित सिंह के नेतृत्व में जवानों की टुकड़ी कमिश्नर ऑफिस पहुंची. अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त विपिन टाडा के साथ करीब एक घंटे तक बैठक की. इस बैठक में आईटीबीपी अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाया कि इसमें केवल संभावनाओं का जिक्र है और यह रिपोर्ट दोषी डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधन को बचाने के लिए बनाई गई है. जवानों का साफ कहना था कि जब एक जवान की मां को न्याय नहीं मिल रहा तो आम जनता का क्या होगा.

अपर पुलिस आयुक्त ने क्या कहा?

अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित पक्ष जांच रिपोर्ट के कई पहलुओं से संतुष्ट नहीं था. इसी को लेकर आईटीबीपी के अधिकारी और जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि मामले में सीएमओ को दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि जांच में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

 

 

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