"मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, बस मेरी मां को इस बारे में कुछ मत बताना." यह दर्दभरी गुहार उस छात्र की है, जो अपनी पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबकर कानपुर से सामने आए किडनी रैकेट के जाल में फंस गया. कानपुर के हैलट अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती बिहार के एमबीए छात्र आयुष कुमार की हालत देखकर हर किसी की आंखें नम हैं.
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महिला मित्र को देख फूट-फूटकर रोया आयुष
बिहार के बेगूसराय की रहने वाली आयुष की एक महिला मित्र जब उससे मिलने अस्पताल पहुंची, तो वह खुद को रोक नहीं पाया. पुलिस की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात के दौरान आयुष अपनी गलती पर बार-बार पछतावा जताता रहा. दोनों देहरादून की एक यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते हैं. उसकी मित्र ने इस आत्मघाती कदम पर नाराजगी भी जताई और डॉक्टरों से आयुष की सेहत का हाल जाना.
हाथ पर I Love You Mom का टैटू
आयुष के हाथ पर "I Love You Mom" का टैटू उसकी अपनी मां के प्रति दीवानगी को बयां करता है. आयुष ने पुलिस को बताया कि पिता की मौत के बाद घर की माली हालत खराब हो गई थी. कॉलेज की फीस भरने और परिवार का सहारा बनने के चक्कर में वह तनाव में था. जमीन गिरवी होने के कारण उसे कहीं से लोन भी नहीं मिल रहा था, जिसके बाद उसने यह खौफनाक रास्ता चुना.
6 लाख का सौदा, मिली सिर्फ आधी रकम
रैकेट के एजेंटों ने आयुष की किडनी का सौदा 6 लाख रुपये में किया था. तय हुआ था कि आधी रकम पहले और बाकी ऑपरेशन के बाद दी जाएगी. लेकिन सर्जरी होने के बाद उसके खाते में केवल 3.5 लाख रुपये ही आए. आयुष ने अब पुलिस से अपनी बाकी रकम दिलाने की मांग भी की है.
नोएडा से कानपुर तक फैला है नेटवर्क
इस मामले की जांच में बड़े खुलासे हो रहे हैं. आयुष की मेडिकल रिपोर्ट नोएडा के एक डॉक्टर को भेजी गई थी, जिसके बाद कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में बाहर से आई डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया. पुलिस अब लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में छापेमारी कर रही है. फरार आरोपियों और इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर दी गई है.
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