साली के 'सपने' ने बर्बाद की जवान की जिंदगी! छेड़खानी के आरोप में काटी जेल, 7 साल बाद कोर्ट ने दी बड़ी राहत

Kanpur POCSO case acquittal: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एयरफोर्स कर्मी अनुराग शुक्ला को साली के आरोपों के आधार पर पॉक्सो के तहत जेल भेज दिया गया. बाद में अदालत में लड़की ने स्वीकार किया कि घटना असल में सपना थी, जिसके बाद उसे बाइज्जत बरी कर दिया गया है. विस्तार से जानिए इस मामले की पूरी कहानी.

Air Force personnel false case India
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रंजय सिंह

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क्या कोई सपना किसी की पूरी जिंदगी तबाह कर सकता है? कानपुर में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 15 साल की लड़की को सपने में हुए अहसास को उसके परिवार ने हकीकत मान लिया और अपने ही दामाद पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. एयरफोर्स में तैनात इस जवान को न केवल 19 दिन जेल में बिताने पड़े, बल्कि 7 साल तक सामाजिक बेइज्जती और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी.

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क्या था पूरा मामला?

बिठूर के रहने वाले एयरफोर्स कर्मी अनुराग शुक्ला की शादी फरवरी 2019 में हुई थी. शादी के कुछ दिन बाद उनकी 15 साल की साली भी अपनी बड़ी बहन के साथ रहने आई थी. 8 मार्च 2019 की रात साली सोते समय अचानक चिल्लाने लगी और आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसे पकड़कर छेड़खानी की है. इसके बाद लड़की के पिता ने नौबस्ता थाने में दामाद के खिलाफ छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट में रिपोर्ट दर्ज करा दी, जिसके बाद अनुराग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

अदालत में खुला सपने का राज

करीब 7 साल तक चले इस मुकदमे में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया. लड़की ने कोर्ट में स्वीकार किया कि घटना वाले दिन उसने दवा खाई थी और वह गहरी नींद में थी. सोते समय उसे सपने में ऐसा महसूस हुआ था कि उसके जीजा ने उसे पकड़ लिया है, जबकि हकीकत में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी.

ससुर पर लगाया साजिश का आरोप

वहीं पीड़ित अनुराग शुक्ला का कहना है कि उनके ससुर, जो पेशे से प्रॉपर्टी डीलर हैं, उन पर प्रॉपर्टी अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे. जब अनुराग ने इससे इनकार किया, तो ससुर ने अपनी नाबालिग बेटी का इस्तेमाल कर उन्हें झूठे केस में फंसाया और ब्लैकमेल किया. इस मुकदमे की वजह से अनुराग का एयरफोर्स में प्रमोशन रुक गया और उनकी छवि भी खराब हुई.

कोर्ट का फैसला

कानपुर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट (ADJ 13) ने सभी तथ्यों और बयानों को सुनने के बाद अनुराग शुक्ला को बाइज्जत बरी कर दिया है. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और केवल गलतफहमी या साजिश पर आधारित थे. 7 साल की लंबी कानूनी लड़ाई और मानसिक पीड़ा के बाद अनुराग अब दोषमुक्त तो हो गए हैं, लेकिन इस एक 'झूठे सपने' ने उनके करियर और सम्मान को जो गहरी चोट पहुंचाई है, उसकी भरपाई मुश्किल है.

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