Lalitpur Assembly Seat 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. बुंदेलखंड की सियासत का केंद्र मानी जाने वाली ललितपुर सदर सीट (Lalitpur Assembly Seat) इन दिनों खासी चर्चा में है. यह एक ऐसी सीट है, जहां लोधी और कुशवाहा जातीय समीकरण तय करते हैं कि विधायक कौन बनेगा. जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) यहां अपनी पहली जीत का रास्ता तलाश रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार दो बार जीत दर्ज कर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है.
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2027 के चुनाव में क्या बीजेपी के राम रतन कुशवाहा हैट्रिक बना पाएंगे, या फिर बीएसपी और सपा-कांग्रेस गठबंधन बाजी मारेगा? आइए समझते हैं ललितपुर का पूरा सियासी और जातीय गणित.
1. ललितपुर का इतिहास: बीएसपी और बीजेपी का रहा है कब्जा
अगर ललितपुर सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें, तो यह सीट बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और बीजेपी का गढ़ रही है.
- 2022: राम रतन कुशवाहा (बीजेपी) विजयी
- 2017: राम रतन कुशवाहा (बीजेपी) विजयी
- 2012: रमेश कुशवाहा (बीएसपी)
- 2009 (उपचुनाव): सुमन कुशवाहा (बीएसपी)
- 2007: नाथूराम कुशवाहा (बीएसपी)
- 2002: वीरेंद्र सिंह बुंदेला (कांग्रेस)
2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी यहां दूसरे नंबर (रनर-अप) पर रही थी, जबकि समाजवादी पार्टी इस सीट पर खाता खोलने के लिए लंबे समय से तरस रही है.
2. वर्तमान विधायक का दावा: 'विकास कार्यों के दम पर जीतेंगे चुनाव'
मौजूदा बीजेपी विधायक राम रतन कुशवाहा का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र की जनता के लिए प्राथमिक स्तर पर विकास कार्य किए हैं. विधायक के अनुसार:
- मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो चुका है.
- शहर की मुख्य सड़कों का निर्माण और ब्रिटिश कालीन शहजाद नदी के पुल का काम जारी है.
- जखौरा में राजकीय महाविद्यालय और रोणा में कंपोजिट विद्यालय का निर्माण चल रहा है.
- लखनपुरा में मिनी स्टेडियम प्रस्तावित है.
विधायक का दावा है कि विकास कार्यों और मोदी-योगी फैक्टर के दम पर वे इस बार सवा लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेंगे.
3. बीएसपी और विपक्ष की क्या है तैयारी?
बीएसपी का पक्ष: 2022 में उपविजेता रही बीएसपी के नेताओं का कहना है कि पिछली बार कुछ छोटी-मोटी चूक हुई थी, जिसे अब बूथ स्तर पर समीक्षा कर ठीक किया जा रहा है. पार्टी मायावती के निर्देशन में पोलिंग बूथ रिव्यू कर 2027 में मजबूत वापसी का दावा कर रही है.
सपा-कांग्रेस (PDA) का समीकरण: स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि इस बार सपा और कांग्रेस अगर मिलकर लड़ते हैं, तो पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का वोट बैंक बीजेपी और बीएसपी के लिए मुकाबला कड़ा बना सकता है.
4. क्या है ललितपुर सीट का जातीय गणित?
ललितपुर सीट मुख्य रूप से दलित और ओबीसी बाहुल्य है. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार यहां का वोट बैंक इस प्रकार है:
- कुशवाहा: 70,000
- लोधी: 55,000
- यादव: 47,000
- अहिरवार (दलित): 37,000
- ब्राह्मण: 26,000
- क्षत्रिय: 25,000
- सहारिया (आदिवासी): 25,000
- मुस्लिम: 13,000
- जैन: 10,000
- अन्य: 42,000
यहां जब भी सवर्ण वोट बैंक के साथ कुशवाहा और लोधी वोट बीजेपी के पक्ष में लामबंद होते हैं, तो बीजेपी का पलड़ा भारी हो जाता है. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती ललितपुर में कोई सर्वमान्य चेहरा सामने लाने की है.
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