माघ मेला नोटिस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा जवाब, 8 पन्नों में दिया कड़ा जवाब

माघ मेला प्राधिकरण के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आठ पन्नों का जवाब भेजा है. उनके वकीलों ने नोटिस को गलत और अपमानजनक बताया है. शंकराचार्य पद को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है.

Real Shankaracharya controversy
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और असली शंकराचार्य विवाद

संतोष सिंह

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प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण और ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है. मेला प्राधिकरण की ओर से भेजे गए नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अंग्रेजी में आठ पन्नों की चिट्ठी भेजी है.

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यह जवाब मेला प्राधिकरण की ई-मेल आईडी पर भेजा गया है. इसके अलावा सेक्टर-4 में स्थित मेला प्राधिकरण के दफ्तर में भी भेज दिया गया है. हालांकि जब स्वामी के अनुयायी जवाब की चिट्ठी देने पहुंचे तो वहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं था. इसके बाद जवाब की कॉपी दफ्तर के गेट पर चिपका दी गई.

क्यों भेजा गया था नोटिस

मेला प्राधिकरण ने मंगलवार को नोटिस जारी कर सवाल उठाया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य किस आधार पर बता रहे हैं, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील ने भेजा जवाब

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से यह जवाब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने भेजा है. चिट्ठी में कहा गया है कि मेला प्राधिकरण का नोटिस अपमानजनक है और इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं.

पुराने आदेशों का दिया गया हवाला

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष से पहले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पी.एन. मिश्रा ने भी स्थिति स्पष्ट की थी. उन्होंने बताया कि प्रशासन जिस आदेश का हवाला दे रहा है, वह 14 अक्टूबर 2022 का है, जबकि उससे पहले 21 सितंबर 2022 के आदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के रूप में संबोधित किया गया था.

उनका कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक 12 अक्टूबर 2022 को ही हो चुका था. जबकि जिस आदेश के आधार पर आपत्ति जताई जा रही है, वह 17 अक्टूबर का है, जिसमें भविष्य में होने वाले पट्टाभिषेक पर रोक लगाई गई थी.

नोटिस को बताया कोर्ट की अवमानना

वकीलों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य लिखा गया है. ऐसे में मेला प्राधिकरण का नोटिस अदालत की अवमानना हो सकता है.

गलत एफिडेविट का आरोप

पी.एन. मिश्रा ने आरोप लगाया कि वासुदेवानंद ने गलत एफिडेविट देकर कोर्ट से आदेश लिया था. इसके खिलाफ याचिका भी दायर की जा चुकी है. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने नोटिस जारी किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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