बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सियासी रण में हुंकार भरने की तैयारी में हैं. लगभग सवा दो साल की राजनीतिक खामोशी के बाद आकाश आनंद 10 अगस्त को हाथरस की सादाबाद सीट से जनसभा करके बीएसपी के चुनाव अभियान का आगाज करेंगे. इसके बाद 25 अगस्त को ग्रेटर नोएडा के जेवर में उनकी दूसरी बड़ी रैली प्रस्तावित है.
ADVERTISEMENT
आकाश आनंद की इस वापसी के साथ ही यह सवाल उठने लगे थे कि क्या बीएसपी में उम्मीदवारों के चयन से लेकर फैसले लेने तक का काम आकाश आनंद ही कर रहे हैं और क्या मायावती ने उन्हें पूरी छूट (Free Hand) दे दी है? इन सभी कयासों के बीच बीएसपी प्रमुख मायावती का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने पार्टी में फैसलों के अधिकार को लेकर स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है.
मायावती का कड़ा संदेश
मायावती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर इन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि उम्मीदवारों का चुनाव आकाश आनंद कर रहे हैं. मायावती ने स्पष्ट किया कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की सभी तैयारियाँ और बैठकें वे खुद लखनऊ कार्यालय में ले रही हैं.
अब तक लगभग दो दर्जन से अधिक उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेकर नाम फाइनल किए जा चुके हैं और आगे भी सभी सीटों पर उम्मीदवारों का अंतिम चयन खुद मायावती ही करेंगी. उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश भर में जहां भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव होते हैं, वहां अंतिम मोहर वे खुद ही लगाती हैं.
मायावती ने ये भी बताया कि उनकी अनुमति से ही पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी और आकाश आनंद तय किए गए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान जनसभाओं में करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद ईमानदारी और निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन टिकट बंटवारे का अधिकार सिर्फ बीएसपी सुप्रीमो के पास ही है.
2024 के वाकये और 2027 के 'करो या मरो' चुनाव की पृष्ठभूमि
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद ने अपने आक्रामक भाषणों से युवाओं और बीएसपी कार्यकर्ताओं में खासा जोश भरा था. हालांकि, सीतापुर में एक चुनावी रैली के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे हमलों के बाद मायावती ने उन्हें कुछ समय के लिए संगठनात्मक पदों से अलग कर दिया था. बाद में उनकी पार्टी में वापसी हुई.
बीएसपी इस वक्त अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 1 सीट मिली थी और 2024 के लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खुल सका था. ऐसे में 2027 का चुनाव बीएसपी के वजूद और आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
ADVERTISEMENT


