उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आए बहुचर्चित नीला ड्रम केस में आज यानी 14 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया गया है. कोर्ट ने 30 सितंबर को ही मुस्कान और साहिल को दोषी ठहरा दिया था और आज कोर्ट ने दोनों को ही मृत्युदंड की सजा सुनाई है. करीब डेढ़ साल से चल रहे इस मामले में जैसे ही मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II ने सजा सुनाया तो कोर्ट रूम में भारत माता की जय के नारे लगे और साथ ही मिठाइयां भी बांटी गई. इस दौरान जज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि 'दंड भी धर्म है.' इस फैसले के आने के बाद अब उस जज अरविंद कुमार मिश्रा की हर जगह चर्चा हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं यह जज और मामले की पूरी कहानी.
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कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा?
मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, अरविंद कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश के मऊ के रहने वाले है. उनका जन्म 2 जुलाई 1971 को हुआ था. उनके पिता का नाम स्वर्गीय बीपी मिश्रा है. अरविंद कुमार मिश्रा ने साल 1990 में बीए, 1994 में LLB और 1996 में LLM की पढ़ाई पूरी की है. फिर 31 मई 2003 को उनकी नियुक्ति न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में हुई.
अलग-अलग जिलों में निभाई जिम्मेदारियां
करीब 23 साल के न्यायिक अनुभव वाले अरविंद कुमार मिश्रा ने सिविल जज से लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तक का सफर तय किया है. उन्होंने अपने करियर के दौरान गाजीपुर, सुल्तानपुर, अलीगढ़ और गोरखपुर समेत विभिन्न जिलों में जिम्मेदारियां निभाईं. अलीगढ़ में उन्होंने सिविल जज, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और रेलवे से जुड़े न्यायिक पदों पर काम किया. इसके बाद वह गोरखपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहे. अप्रैल 2014 में उनकी तैनाती कानपुर नगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में हुई.
यूपी शासन में रह चुके हैं विशेष सचिव
मिश्रा ने कानपुर नगर में अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के रूप में भी सेवाएं दीं. अप्रैल 2018 से अगस्त 2020 तक वह उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव एवं अपर विधि परामर्शदाता (विधायी) के पद पर प्रतिनियुक्ति पर रहे. इसके बाद उन्होंने बस्ती और कानपुर नगर में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली. मई 2023 में उन्हें लखनऊ स्थित राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया.
करीब 5 महीने पहले मेरठ हुए थे ट्रांसफर
नवंबर 2024 में वह मिर्जापुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 मई 2026 को जारी स्थानांतरण अधिसूचना में उन्हें मेरठ का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया. इसके बाद 21 मई 2026 से उनकी मेरठ में तैनाती दर्ज है. मेरठ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सौरभ राजपूत हत्याकांड भी चर्चा में रहा. इस मामले में 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया गया. यह मामला नीले ड्रम में शव छिपाने के कारण देशभर में सुर्खियों में रहा. दोनों दोषियों को सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी और अब साहिल और मुस्कान को मृत्युदंड की सजा सुनाई है.
अरविंद कुमार मिश्रा-II का न्यायिक करियर विभिन्न जिलों में न्यायिक पदों, परिवार न्यायालय, राज्य सरकार के विधि विभाग और अपीलीय न्यायाधिकरण में काम करने के अनुभव से समृद्ध रहा है. उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति तिथि 31 जुलाई 2031 है.
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