मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्यु दंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की बेचैनी बढ़ गई है. जेल प्रशासन के अनुसार, दोनों दोषी रात में ठीक से सो नहीं सके. उन्होंने रात का खाना भी नहीं खाया. सुबह नाश्ता दिया गया, लेकिन दोनों ने उसे भी नहीं खाया. अब जेल में दोनों की पहचान उनके नाम के बजाय बंदी नंबर से होगी.
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मुस्कान को बैरक नंबर 12 बी, साहिल को 15
जेल में मुस्कान को बैरक नंबर 12 बी में रखा गया है, जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में है. दोनों को जेल के कपड़े दे दिए गए हैं. अब उन्हें जेल के तय कपड़े पहनकर रहना होगा. साहिल को सफेद रंग के दो जोड़ी कुर्ता-पायजामे दिए गए हैं. वहीं, मुस्कान को सफेद और क्रीम रंग के कपड़े मिले हैं. इनमें एक साड़ी और एक सूट शामिल है.
मुस्कान करेगी सिलाई, साहिल को खेती-बाड़ी का काम
जेल में मुस्कान और साहिल को काम भी आवंटित कर दिए गए हैं. मुस्कान को सिलाई का काम दिया गया है. वहीं, साहिल जेल में खेती-बाड़ी का काम करेगा.
मृत्यु दंड की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को बंदी नंबर आवंटित किए गए हैं. साहिल का बंदी नंबर 395/2026 है, जबकि मुस्कान का नंबर 396/2026 है. जेल की आगे की प्रक्रिया में दोनों की पहचान इन्हीं नंबरों के आधार पर दर्ज होगी.
इस मामले में मुस्कान की चिंता का एक बड़ा कारण उसकी बेटी का भविष्य भी है. बताया जा रहा है कि वह बेटी की परवरिश और उसकी देखभाल को लेकर परेशान है.
नीला ड्रम हत्याकांड में दोनों को मिली फांसी की सजा
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई. करीब डेढ़ साल से चर्चा में रहे इस मामले में फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों आरोपी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए. कोर्ट रूम में सौरभ राजपूत की मां रेनू राजपूत और उनके भाई भी मौजूद थे.
सजा सुनाए जाने से पहले मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में लिखित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर उनकी बेटी को फांसी की सजा मिलती है, तो वे इसका विरोध नहीं करेंगे. उन्होंने सौरभ को अच्छा लड़का भी बताया था.
क्या था पूरा नीला ड्रम हत्याकांड?
यह वारदात 3 मार्च 2025 को मेरठ में हुई थी. आरोप के मुताबिक, मुस्कान रस्तोगी और साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी. इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके कई टुकड़े किए गए. फिर उन्हें नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखा गया. आरोप है कि ड्रम में शव के टुकड़े रखने के बाद उसमें सीमेंट का घोल डालकर उसे पूरी तरह सील कर दिया गया था.
इस मामले ने शव को नीले ड्रम में छिपाने की वजह से देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं. अब अदालत की ओर से दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है.
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