मेरठ की विशेष अदालत द्वारा बहुचर्चित नीला ड्रम केस में मुस्कान और साहिल को सजा-ए-मौत (मृत्युदंड) सुनाए जाने के बाद पूरे प्रदेश की निगाहें अब मेरठ डिस्ट्रिक्ट जेल पर टिक गई हैं. फैसला सुनाए जाने के वक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) रूम में मौजूद मेरठ जेल के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज ने कोर्ट रूम के उस संवेदनशील पल का आंखों देखा हाल साझा किया. उन्होंने बताया कि जैसे ही माननीय अदालत ने दोनों को मृत्युदंड देने का सेंटेंस बोला, दोनों आरोपी गहरे सदमे में चले गए और रोने लगे. फैसला सुनते ही उनके चेहरे के हाव-भाव और रंग पूरी तरह उड़ गए.
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3 फीट की दूरी पर खड़े थे दोनों, सुबह थी आजीवन कारावास की उम्मीद
जेल प्रशासन के अनुसार, दोपहर बाद 4:15 बजे जब जिला जज ने फैसला सुनाया, तब मुस्कान और साहिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम में एक-दूसरे से महज 3 फीट की दूरी पर खड़े थे. दोनों का चेहरा न्यायालय की स्क्रीन की तरफ था. 30 तारीख को दोष सिद्ध होने के बाद दोनों को लग रहा था कि शायद उन्हें उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा मिलेगी. सुबह की बहस के वक्त भी उन्हें इसी बात की उम्मीद थी, लेकिन शाम को जैसे ही न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी सजा 'फांसी' का ऐलान हुआ, उनके उम्मीद के सारे चिराग बुझ गए और दोनों रो पड़े. फैसले के दौरान दोनों को आपस में बातचीत करने की अनुमति नहीं थी.
हाई कोर्ट में अपील की तैयारी और कानूनी प्रक्रिया
जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज ने स्पष्ट किया कि मेरठ अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद अब अपीलों का दौर शुरू होगा. फैसले के तुरंत बाद दोनों आरोपियों की काउंसलिंग कराई गई और उन्हें उनके विधिक अधिकारों की जानकारी दी गई. उन्हें बताया गया है कि वे उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं. यदि वे अपना निजी वकील नहीं रख पाते हैं, तो जेल प्रशासन 'स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी' के माध्यम से उनकी निशुल्क अपील दाखिल कराएगा. आरोपियों ने फैसला लेने के लिए एक-दो दिन का समय मांगा है.
24 घंटे सीसीटीवी और कड़े पहरे में रहेंगे मुस्कान और साहिल
सजा-ए-मौत मिलने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों कैदियों की सुरक्षा बढ़ा दी है. उन्हें सामान्य बैरक से हटाकर सजायाफ्ता (कन्विक्ट) बंदियों की विशेष बैरक में शिफ्ट किया जा रहा है. वीरेश राज के मुताबिक, ऐसे कैदियों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उन पर 24 घंटे निरंतर निगरानी रखी जा रही है. पुरुष बैरक में साहिल पर सीसीटीवी कैमरे और बंदी रक्षकों के जरिए नजर रखी जा रही है, जबकि मुस्कान की बैरक में महिला बंदी रक्षक तैनात की गई हैं. यहां तक कि टॉयलेट जाने के समय भी कड़ी चौकसी और पर्यवेक्षण रहेगा. वर्तमान में मुस्कान मेरठ जेल की एकमात्र महिला कैदी है जिसे मृत्युदंड की सजा मिली है.
जेल में बेटी, परिवार की बेरुखी और मुस्कान की अधूरी ख्वाहिश
सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत मुस्कान के साथ जेल में जन्म लेने वाली उसकी छोटी बेटी फिलहाल उसी की बैरक में रहेगी, जिसकी उम्र 6 साल होने तक साथ रहने का प्रावधान है. हालांकि, मुस्कान अपनी बड़ी बेटी से भी मिलना चाहती है, जो उसके परिजनों के पास है. पिछले डेढ़ सालों में मुस्कान से जेल में मिलने उसका कोई भी पारिवारिक सदस्य या बड़ी बेटी नहीं आए हैं. जेल प्रशासन ने मुस्कान को परिजनों को पत्र लिखने की अनुमति दी है ताकि वह अपनी बेटी से मिलने की इच्छा जता सकें.
जेल के अंदर दोनों करेंगे काम
सजा का आदेश औपचारिक रूप से मिलते ही दोनों को कन्विक्ट नंबर (कैदी नंबर) और जेल के कपड़े दिए गए. चूंकि दोनों को सश्रम कारावास की सजा का पालन करना होगा, इसलिए जेल में उनसे काम भी कराया जाएगा. साहिल को बागवानी और खेती के काम में लगाया जाएगा, जिसे वह पहले से करता आ रहा था. वहीं, मुस्कान को महिला बैरक की फैक्ट्री में कौशल विकास के तहत सिलाई-कढ़ाई और कपड़े बनाने के काम में लगाया जाएगा.
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