मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ बरसाने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय इस समय हर तरफ चर्चा का विषय बने हुए हैं. उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए इस थप्पड़ कांड के बाद सोशल मीडिया पर उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि गुस्से को काबू न कर पाने वाले और चर्चा में आए मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय का बैकग्राउंड क्या है और उनका विवादों से क्या नाता रहा है.
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कौन हैं आईपीएस अविनाश पांडेय और क्या है उनका बैकग्राउंड
एसएसपी अविनाश पांडेय 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुआ था और उनके पिता का नाम श्रवण कुमार पांडेय है. अविनाश पांडेय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है. पुलिस सेवा में आने के बाद वे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. मेरठ से पहले वे पीलीभीत और मऊ में बतौर एसपी (SP) तैनात रह चुके हैं. इसके अलावा वे गाजियाबाद में एसपी सिटी और प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
दो बार मिल चुका है महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह
अविनाश पांडेय को पुलिस सेवा के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दो बार महानिदेशक प्रशंसा चिन्ह (डीजी कमेंडेशन डिस्क) से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें पहली बार 15 अगस्त 2022 को पुलिस सेवा में बेहतरीन कार्य के लिए सिल्वर मेडल दिया गया था. इसके बाद 26 जनवरी 2025 को उन्हें उनके शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है.
आखिर मेरठ में क्यों भड़के एसएसपी अविनाश पांडेय
मेरठ में बुधवार को हुए पूरे मामले की शुरुआत एक हत्याकांड के विरोध से हुई थी. दरअसल, बीते 15 मई को परीक्षा देने गई बीए की एक छात्रा ललिता गौतम का शव 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के एक गन्ने के खेत में मिला था. इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन मृतका के परिजन और दलित समाज के लोग आरोपी के पूरे परिवार और उसके सहयोगियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे. पिछले दो महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण और बड़ी संख्या में महिलाएं बुधवार को कलेक्टरेट पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे.
प्रदर्शन के दौरान कलेक्टरेट का मुख्य दरवाजा और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया, जिससे वहां भीषण जाम लग गया. मौके पर पहुंचे एसएसपी अविनाश पांडेय अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए और उन्होंने जाम लगाने वाले प्रदर्शनकारियों पर थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए. उन्होंने न सिर्फ सड़क पर मौजूद लोगों को पीटा, बल्कि पुलिस की गाड़ी में बैठाए गए एक युवक पर भी हाथ उठाया. अब सोशल मीडिया पर उनके इस बर्ताव का वीडियो वायरल हो रहा है.
ईद की नमाज से लेकर मुख्तार अंसारी पर एक्शन तक रहे चर्चा में
यह पहली बार नहीं है जब एसएसपी अविनाश पांडेय अपने बयानों या सख्त फैसलों को लेकर सुर्खियों में आए हैं. 13 मार्च 2026 को मेरठ के एसएसपी रहते हुए उन्होंने एक बड़ा बयान दिया था कि किसी भी हाल में सार्वजनिक सड़क पर ईद की नमाज अदा नहीं करने दी जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी थी कि कानून व्यवस्था में खलल डालने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त मुकदमेबाजी और पासपोर्ट जब्ती जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले, मऊ जिले में अपनी तैनाती के दौरान अविनाश पांडेय मुख्तार अंसारी की अवैध संपत्तियों को जब्त करने के मामले में काफी सक्रिय दिखे थे, जिसके कारण वे काफी चर्चा में रहे थे.
अपने ही मातहतों पर निकाल चुके हैं गुस्सा
एसएसपी अविनाश पांडेय का गुस्सा सिर्फ आम जनता या अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि अपने विभाग के कर्मचारियों पर भी देखने को मिल चुका है. मई के महीने में एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जब उन्होंने एक इंस्पेक्टर से किसी मामले की जानकारी मांगी और वह जवाब नहीं दे पाया, तो एसएसपी भड़क उठे.
उन्होंने भरी कॉन्फ्रेंस में इंस्पेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि वे तत्काल थाना छोड़ दें और घर जाकर आराम करें. इसके बाद उन्होंने इंस्पेक्टर को निलंबित करने का आदेश भी जारी किया था. उन्होंने अन्य इंस्पेक्टरों और थानों के प्रभारियों (SO) को भी चेतावनी दी थी कि वे सुधर जाएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें.
फिल्मी शौकीन और खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई
सख्त मिजाज अधिकारी होने के साथ-साथ एसएसपी अविनाश पांडेय फिल्मों के भी बेहद शौकीन बताए जाते हैं. हाल ही में जब फिल्म 'धुरंधर 2' रिलीज हुई थी, तब वे अपने विभाग के 498 नवनियुक्त दरोगाओं के साथ फिल्म देखने सिनेमाहॉल पहुंचे थे. उन्होंने अपने मातहत दरोगाओं के लिए पूरे के पूरे दो हॉल बुक करवा दिए थे.
इसके अलावा, पीलीभीत में तैनाती के दौरान भी उनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा था. वहां उन्होंने पूरनपुर क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ में तीन खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था. साथ ही फर्जी पासपोर्ट और वीजा के सहारे सिख युवकों को कनाडा भेजने के गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 100 से ज्यादा मामले दर्ज कराए थे.
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