कुदरत का अजीब फैसला, मां-बाप की मौत, पर चमत्कारिक रूप से बच गए 8 बच्चे, हिला देगी मुरादाबाद की ये खबर

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बीती रात आए आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई. मुंडापांडे के दलपतपुर गांव में सो रहे दंपत्ति पर पड़ोसी की दीवार गिर गई, जिससे मलबे में दबकर दोनों की मौत हो गई. गनीमत रही कि कुछ दूरी पर सो रहे उनके 8 बच्चे चमत्कारिक रूप से बच गए.

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जगत गौतम

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यहाँ मुंडापांडे थाना क्षेत्र के दलपतपुर गांव में बीती रात आए भीषण आंधी-तूफान ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया. कुदरत के इस कहर ने जहां 8 मासूम बच्चों की जान तो बख्श दी लेकिन उनके सिर से उनके माता-पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया.

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सोते समय काल बनकर गिरी दीवार

जानकारी के अनुसार, दलपतपुर गांव के रहने वाले इदरीस और उनकी पत्नी फात्मा रात में अपने घर के आंगन में सो रहे थे. इसी बीच आधी रात के बाद अचानक मौसम बदला. तेज आंधी और तूफान के कारण पड़ोसी के मकान की एक कच्ची दीवार भरभराकर सीधे दंपत्ति के ऊपर गिर गई. इदरीस और फात्मा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे भारी मलबे के नीचे दब गए.

8 बच्चों का हुआ चमत्कारिक बचाव

इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दंपत्ति के 8 बच्चे भी उसी आंगन के दूसरे हिस्से में सो रहे थे. माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी महज कुछ कदमों की थी. जब दीवार गिरी तो बच्चे सुरक्षित बच गए, लेकिन मलबे की आवाज और माता-पिता की चीख सुनकर वे सहम गए. चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे. मलबे को हटाकर दोनों को बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

गांव में मातम 

हादसे के बाद पूरे दलपतपुर गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. हर किसी की आंखों में आंसू हैं और ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक रात की आंधी इतनी बड़ी तबाही लेकर आएगी.

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और कागजी कार्रवाई के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है. फिलहाल प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर मौजूद है और नुकसान का जायजा ले रही है.

अनाथ हुए बच्चों का भविष्य दांव पर

इदरीस और फात्मा की मौत ने उनके 8 बच्चों को अनाथ कर दिया है. अब इन मासूमों की देखभाल कौन करेगा, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उनका कहना है कि सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला. गांव के लोग अब प्रशासन से इन अनाथ बच्चों के लिए मदद और मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं.

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