नैनीताल में 12 हजार गाड़ियों की एंट्री और कैंची धाम तक महाजाम, जब छुट्टियां मनाने निकले लोगों की छूट गई ट्रेन!

लीला सिंह बिष्ट

• 03:08 PM • 03 Oct 2026

गांधी जयंती और लंबे वीकेंड पर करीब 12 हजार पर्यटक नैनीताल पहुंचे. भारी भीड़ के कारण भवाली से कैंची धाम, गरमपानी और खैरना तक कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया.

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लंबे वीकेंड का अपना अलग ही भौकाल होता है. ऑफिस की चिकचिक से दूर वादियों की ठंडी हवा खाने का मन किसे नहीं करता? लेकिन अगर आप भी इस वीकेंड नैनीताल या नीम करौली बाबा के दर पर कैंची धाम जाने की सोच रहे हैं, तो जरा ठहरिए. वहां की सड़कों का हाल देख लेंगे तो शायद सोफे से उठने का मन न करे.

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गांधी जयंती की छुट्टियों का फायदा उठाने के चक्कर में नैनीताल और कैंची धाम की तरफ इतना टूरिस्ट उमड़ा कि पूरा सिस्टम चरमरा गया. आंकड़ा 12 हजार सैलानियों के पार पहुंच चुका है. सुबह 7 बजे से ही हाईवे पर गाड़ियों के चक्के थमने लगे थे. देखते ही देखते भवाली से लेकर कैंची धाम, गरमपानी और खैरना तक गाड़ियां ऐसे खड़ी हो गईं जैसे कोई कार का शोरूम सजा हो.

जाम में फंसे लोग, छूट गई काठगोदाम से ट्रेन

सबसे बुरा हाल उन लोगों का हुआ जिन्हें घूमकर वापस लौटना था या जो आगे का सफर तय कर रहे थे. हल्द्वानी और काठगोदाम की तरफ जाने वाली सड़कों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक था. नतीजा यह हुआ कि कई सैलानी घंटों जाम में ही फंसे रह गए और स्टेशन पहुंचते-पहुंचते उनकी ट्रेनें प्लेटफॉर्म छोड़ चुकी थीं.

पुलिस का धांसू प्लान कैसे हो गया फुस्स?

ऐसा नहीं है कि खाकी वाले हाथ पर हाथ धरे बैठे थे. पुलिस ने बाकायदा 2 से 4 अक्टूबर तक का 'स्पेशल ट्रैफिक प्लान' तैयार किया था. गाड़ियों को पहले ही रोकने, पार्किंग में खड़ी कराने और आगे कैंची धाम के लिए शटल बसें चलाने का तगड़ा बंदोबस्त था. लेकिन साहब, जब गाड़ियों की बाढ़ आ जाए तो बांध काम नहीं आते.

कैंची धाम और भवाली की पार्किंग में जैसे ही 'हाउसफुल' का बोर्ड लगा, सड़कों पर कतारें लंबी होने लगीं. भारी गाड़ियां, बसें, कारें और लद्दाख वाले बाइकर सब एक ही कतार में फंसकर रह गए.

नैनीताल शहर का भी हाल-बेहाल

बात सिर्फ हाईवे की नहीं है. दोपहर होते-होते नैनीताल शहर के अंदर भी जाम की एंट्री हो गई. हल्द्वानी रोड हो या कालाढूंगी मार्ग, हर तरफ रेंगते वाहन दिखे. हनुमानगढ़ी से रूसी बाईपास तक तो ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ियां चल नहीं रही हैं, बस खिसक रही हैं. शहर का मशहूर मालरोड, जू रोड और शेरवानी मार्ग सब जगह चक्का जाम की स्थिति रही.

कारोबारी मस्त, स्थानीय जनता पस्त

अब इस पूरी कहानी के दो पहलू हैं. पहला पहलू उन होटल वालों, रेस्तरां मालिकों और टैक्सी ड्राइवरों का है जिनके चेहरे खिल उठे हैं. लंबे समय बाद धंधे में ऐसी तेजी आई है. लेकिन दूसरा पहलू स्थानीय निवासियों का है, जिनका अपने ही शहर में घर से निकलना मुहाल हो गया है.

खैर, जाम का झाम अपनी जगह है और घूमने की दीवानगी अपनी जगह. नैनी झील में बोटिंग हो या चिड़ियाघर और स्नो व्यू का चक्कर, सैलानी हर जगह जमावड़ा लगाए हुए हैं. पर इस भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पहाड़ों में ट्रैफिक मैनेजमेंट अब भी एक टेढ़ी खीर है

(रिपोर्टर: लीला सिंह बिष्ट, नैनीताल)