सेक्टर 30 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (चाइल्ड पीजीआई) नोएडा में डॉक्टरों की कमी बाल मरीजों के इलाज में बड़ी बाधा बन रही है. संस्थान में कम वेतन मिलने की वजह से नए डॉक्टर नौकरी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं और कई डॉक्टर नौकरी छोड़कर जा चुके हैं जिसका असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है. पिछले 3 साल में प्रोफेसर, एडिशनल प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत करीब 22 डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं. कुल 126 सीट में 56 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं और 70 सीट खाली पड़ी हैं जिसके लिए डॉक्टर ही नहीं मिल रहे हैं. डॉक्टर को मिलने वाले भत्ते में सातवें वेतनमान का लागू न होना डॉक्टरों की कमी का मुख्य कारण बताया जा रहा है.
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चाइल्ड पीजीआई के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-2, 2015 में यह लिखा है कि चाइल्ड पीजीआई संस्थान के शैक्षणिक, चिकित्सकीय पदों के लिए एसजीपीजीआई लखनऊ के अनुरूप वेतन एवं अन्य परिलब्धियां मान्य होंगी, लेकिन एसजीपीजीआई लखनऊ के अनुरूप वेतन एवं परिलब्धियां अब तक लागू नहीं हुई है. 2016 में सातवां वेतनमान आया था और इसे फैकेल्टी की बेसिक सैलरी में लागू कर दिया गया, लेकिन अन्य भत्तों में अब तक लागू नहीं किया गया.
सैलरी के अलावा अन्य भत्ते छठे वेतनमान के अनुरूप ही दिए जा रहे हैं. यही वजह है कि यहां पर काम करने वाले स्टाफ लगातार नौकरी छोड़कर जा रहे हैं. दिल्ली पास में होने की वजह से उन्हें सरकारी संस्थान में अच्छी सैलरी में नौकरी मिल रही. यही नहीं, नोएडा के कई निजी संस्थान भी यहां से अधिक वेतन दे रहे हैं. यदि यहां पर भी अन्य भत्तों में सातवें वेतनमान को लागू कर दिया जाए तो सैलरी में 60 से 70 हजार का जो फर्क आ रहा है वह खत्म हो जाएगा. संस्थान के डॉक्टर इस स्थिति को आर्थिक एवं मानसिक हानि भी बता रहे हैं.
न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी में कोई डॉक्टर नहीं
संस्थान में कई ऐसे विभाग हैं जहां पर कोई डॉक्टर ही नहीं हैं. इसमें न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी भी शामिल है. इस विभाग के मरीजों कोई अन्य अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है. रेडियोलॉजी विभाग में करीब 9, 10 पद हैं लेकिन एक ही डॉक्टर काम कर रहे हैं. वहीं नेफ्रोलॉजी में भी कई पद हैं लेकिन विभाग लंबे समय तक खाली रहा और हाल ही में एक डॉक्टर ने यहां नौकरी ज्वाइन की है. पिछले 3 साल में फैकल्टी के रिक्त पदों के संबंध में विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन कोई हल नहीं निकला.
मुख्य्मंत्री से भी लगा चुके गुहार
फैकल्टी एसोसिएशन ऑफ सुपरस्पेशलिटी पीडियाट्रिक इंस्टीट्यूट नोएडा की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा जा चुका है लेकिन किसी भी मामले में कोई हल नहीं निकला.
फैकल्टी को दिए जाने वाले कुछ भत्ते
एचआरए - हाउस रेंट अलाउंस
एनपीए - नॉन प्रैक्टिस अलाउंस
टीए - ट्रैवल एलाउंस
सीआरए - क्लीनिकल रिसर्च अलाउंस
एलआरए - लर्निंग रिसोर्स अलाउंस
एलटीसी - लीव ट्रैवल कन्टेलेशन
कन्वेंस अलाउंस
मोबाइल अलाउंस आदि.
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