Noida industrial workers protest: नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में पिछले तीन दिनों से चला रहा प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन सोमवार हो हिंसक हो उठा. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कई जगहों पर सड़क जाम कर दिया. इससे शहर के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर जाम की स्थिती बढ़ गई. इस दौरान कुछ स्थानों पर गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें भी सामने आईं, जिसके वीडियोज सामने आए हैं. प्रशासन को बिगड़ते हालात संभालने के लिए कई रूटों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा है.
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फैक्ट्री का दरवाजा तोड़ अंदर घुसे श्रमिक
सबसे हैरान करने वाली तस्वीरें नोएडा के सेक्टर 62 से सामने आई हैं. यहां मौके पर मौजूद हमारे सहयोगी आजतक के रिपोर्टर के अनुसार, उत्तेजित भीड़ ने एक फैक्ट्री का मेन दरवाजा तोड़ दिया और परिसर के अंदर धुस गए. इसके बाद फैक्ट्री के अंदर जमकर नारेबाजी और हंगामे का दौर चला. बताया जा रहा है कि मौके पर शुरुआती समय मेंपर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं होने के कारण भीड़ पूरी तरह बेकाबू नजर आई.
केवल वेतन नहीं शोषण भी है बड़ी वजह
यह पूरा विवाद केवल वेतन बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि यह उनके लंबे समय से दबे हुए गुस्से और शोषण का परिणाम है. कर्मचारियों ने कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें केवल कागजों पर आश्वासन दिया जाता है, लेकिन हकीकत में उनका जीवन नहीं बदल रहा है. पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन ने श्रमिकों के बीच असंतोष को और अधिक गहरा कर दिया है.
वहानों में लगाई आग, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
आपको बता दें कि नोएडा के फेज-2 इलाके में तोड़फोड़ की कई घटनाएं सामने आईं. वहीं, सेक्टर-84 में गड़ियों में आगजनी की घटना भी सामने आई है. आरोप है कि प्रर्दशनकारियों ने दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस वाहन को भी क्षतिग्रस्त किया गया है. इसका वीडियो भी सामने आया है. वहीं कई अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया.फिलहाल, मौके पर स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, लेकिन इलाके में तनाव का माहौल अब भी बना हुआ है.
प्रशासन के वादे और जमीनी हकीकत
बीते दिन प्रशासन ने कुछ मांगें मान ली थीं ऐसे में अब फिर आज हिंसा क्यों भड़की, इसे लेकर सवाल पूछा जा रहा है. इस पर कर्मचारियों का तर्क है कि सरकारी फाइलों में नियम बन जाने मात्र से उनकी स्थिति में सुधार नहीं आता, उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए. श्रमिकों के अनुसार, उन्होंने पहले भी कई बार ऐसे मीठे वादे सुने हैं जो कभी पूरे नहीं हुए.
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