नोएडा के फेज-2 के इंडस्ट्रियल एरिया में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के भीतर सुलग रहा आग अचानक सोमवार को फूट पड़ा. पिछले 3 दिनों से चल रहा यह विरोध सोमवार को हिंसक हो उठा और कर्मचारी सड़क पर उतरे गए. सेक्टर- 62, 59, 84 और सूरजपुर के आसपास इलाकों में सुबह से ही माहौल बिगड़ा हुआ और सैकड़ों कर्मचारी सड़क पर उतर विरोध के साथ-साथ तोड़फोड़ भी कर रहे है. इसी बीच सोशल मीडिया पर ऐसी सूचनाएं फैलनी लगी की इस प्रदर्शन में यूपी पुलिस द्वारा फायरिंग की गई है, जिसमें 14 लोगों की मौत और 32 घायल हो गए है. लेकिन अब यूपी पुलिस ने इस फैल रही जानकारी की असलियत बताई है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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यूपी पुलिस ने बताई पूरी सच्चाई
नोएडा में चल रहे विरोध के बीच यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट किया. पोस्ट में उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक बताया और साथ ही स्क्रीनशॉट भी अटैच किए, जिसमें इस विरोध प्रदर्शन को GENZ आंदोलन का नाम दिया गया है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'श्रमिकों द्वारा अन्य राज्य से दुष्प्रेरित होकर नोएडा में कई जगह प्रदर्शन किया गया है, मात्र एक जगह हिंसक प्रदर्शन होने पर पुलिस द्वारा न्यूनतम बल प्रयोग कर स्थितियां नियंत्रित की गई हैं. पुलिस द्वारा कहीं भी फायरिंग नही की गयी है. असत्य एवं भ्रामक सूचना फैलाए जाने एवं व्यक्तियों को भड़काने के कारण संबंधित के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जा रही है. अफवाह व भ्रामक सूचना न फैलाएं.'
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल इस आंदोलन की आग हरियाणा के मानेसर से लगी थी, जिसके लपटें नोएडा तक पहुंच चुकी है. IMT मानेसर के HMSI (होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर प्लांट) में 3 अप्रैल को पहली बार अस्थाई वर्कर्स ने सैलरी बढ़ाने को लेकर प्रोटेस्ट किया. धीरे-धीरे इसमें कई कंपनियों के कर्मचारी जुड़ते गए और 6 अप्रैल को हजारों कर्मचारी ने काम बंद कर हड़ताल की घोषणा कर दी. कर्मचारियों का कहना है कि जितनी सैलरी मिलती है उतने में गुजारा होना बेहद की मुश्किल हो रहा है.
फिलहाल इन्हीं मांगों को लेकर नोएडा के फेज-2 में हंगामा मचा हुआ है. विरोध के दौरान सेक्टर-62 और सेक्टर-63 से बेहद ही हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई है जहां पर गुस्साई भीड़ ने एक कार में आग लगा दी है तो कहीं लोग फैक्ट्री के अंदर घुसकर हल्ला-हंगामा कर रहे है.
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