नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड रूपेश राय गिरफ्तार! पाकिस्तान से जुड़ा कनेक्शन, WhatsApp चैट से खुले चौंकाने वाले राज

Noida Violence Mastermind Arrested: नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा हुआ है और मास्टरमाइंड रूपेश राय गिरफ्तार हो गया है. जांच में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया, जहां से सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाई गईं. व्हाट्सएप चैट और QR कोड के जरिए हिंसा की साजिश रची गई. जानिए कैसे मजदूर प्रदर्शन की आड़ में भड़काई गई हिंसा और पुलिस की कार्रवाई की पूरी कहानी.

Noida Violence Update
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भूपेंद्र चौधरी

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Noida violence case: 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में हुई भीषण हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह हिंसा कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी. नोएडा पुलिस ने इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड रूपेश राय समेत तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में पाकिस्तानी एंगल भी सामने आया है. विस्तार से जानिए इस मामले की पूरी कहानी.

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पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे सोशल मीडिया हैंडल

पुलिस कमिश्नरेट नोएडा की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य 'पाकिस्तान कनेक्शन' के रूप में सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X(पूर्व ट्विटर) के दो हैंडल @ProudIndianNavi और एक अन्य लगातार पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे. इन हैंडल्स के जरिए पुलिस फायरिंग और मजदूरों की मौत जैसी भ्रामक खबरें फैलाई गईं, जिससे शांत हो चुके मजदूर दोबारा भड़क गए और हिंसा शुरू हो गई. जांच में इन हैंडल्स के आईपी एड्रेस पाकिस्तान के पाए गए हैं.

WhatsApp ग्रुप और क्यूआर कोड का खेल

हिंसा भड़काने के लिए आरोपियों ने डिजिटल माध्यमों का शातिर तरीके से इस्तेमाल किया. 9 और 10 अप्रैल को क्यूआर कोड भेजकर कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए. इन ग्रुपों में मजदूरों को फैक्ट्रियों में काम बंद करने, सड़कों पर उतरने और आगजनी करने के लिए उकसाया जा रहा था. पुलिस ने आरोपी रूपेश राय, मनीषा चौहान और आदित्य आनंद के मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनकी चैट से हिंसा की पूरी प्लानिंग के सबूत मिले हैं.

62 लोग गिरफ्तार, हिंसा में बाहरी तत्वों का हाथ

नोएडा पुलिस ने अब तक इस मामले में 13 मुकदमे दर्ज किए हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल और आगजनी करने वाले ज्यादातर लोग मजदूर नहीं, बल्कि 'आउटसाइडर्स' थे. इन बाहरी लोगों को भीड़ में शामिल कर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिलवाया गया. गिरफ्तार आरोपियों में नौ लोग सीधे तौर पर आगजनी की घटनाओं में शामिल पाए गए हैं.

सैलरी बढ़ाने की मांग की आड़ में रची साजिश

बता दें कि मजदूर अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी का फायदा उठाकर 'मजदूर बिगुल दस्ता' जैसे संगठनों से जुड़े आरोपियों ने उन्हें भड़काया. हालांकि, प्रशासन और मिल मालिकों ने 13 अप्रैल की रात को ही स्किल्ड, अनस्किल्ड और सेमी-स्किल्ड मजदूरों की सैलरी बढ़ाने का फैसला ले लिया था, लेकिन तब तक साजिशकर्ता अपना काम कर चुके थे. पुलिस अब इस मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैंडल्स के नेटवर्क को और गहराई से खंगाल रही है.

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