मजदूरों ने बता दी 4 से सैलरी न बढ़ने वाली असली कहानी, LPG समेत खाने-पीने की महंगाई में फूटा घर चलाने का दर्द

नोएडा के सेक्टर-62 में हजारों श्रमिकों ने पिछले 4 साल से सैलरी न बढ़ने और महंगाई के विरोध में हिंसक प्रदर्शन किया और सड़कों को जाम कर दिया. मजदूरों का आरोप है कि कंपनियां जांच अधिकारियों के सामने उनसे झूठी सैलरी बताने का दबाव डालती हैं और विरोध करने पर नौकरी से निकाल देती हैं.

नौएडा
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न्यूज तक डेस्क

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दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा में श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा है. पिछले तीन-चार दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन ने सोमवार सुबह हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद शहर के कई इलाकों में आगजनी और जाम की खबरें सामने आईं. सेक्टर-62 में हजारों की संख्या में श्रमिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे पूरा इलाका ठप हो गया है. मजदूरों का आरोप है कि पिछले 4 साल से उनकी तनख्वाह में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है.

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"सैलरी बढ़ाने की बात करो तो नौकरी से निकाल देते हैं"

सड़कों पर धरने पर बैठे मजदूरों ने 'यूपी तक' से बातचीत में अपना दर्द बयां किया. एक श्रमिक ने बताया, "मकान का किराया बढ़ गया, गैस महंगी हो गई और अब तो मिल भी नहीं रही है. 11,000 रुपये की सैलरी में गुजारा कैसे हो? जब भी हम प्रबंधन से सैलरी बढ़ाने की बात करते हैं, तो हमें सीधे नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है." कई मजदूरों का आरोप है कि कंपनी 6 महीने में ही वर्कर्स को 'रिटर्न' (निकाल) कर देती है ताकि उन्हें स्थायी लाभ न देना पड़े.

जांच अधिकारियों के सामने 'झूठ' बुलवाने का आरोप

प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जब भी कोई श्रम विभाग का जांच अधिकारी कंपनी में आता है, तो मजदूरों पर दबाव बनाया जाता है कि वे अपनी सैलरी 25,000 रुपये बताएं, जबकि असल में उन्हें केवल 11,000 से 15,000 रुपये ही मिलते हैं. मजदूरों ने कहा, "अधिकारी कंपनियों से मिलीभगत कर पैसे खाते हैं और हमारी सुनने वाला कोई नहीं है."

जाम से बेहाल हुआ नोएडा, बातचीत का रास्ता बंद

श्रमिकों के इस 'हाई-वोल्टेज' प्रदर्शन के कारण नोएडा के कई प्रमुख रास्ते जाम हो गए हैं. सेक्टर-62 के चौराहे पर मजदूर डटे हुए हैं और उनका कहना है कि 4 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कंपनी का कोई मालिक या बड़ा अधिकारी उनसे बात करने नहीं आया है. मजदूरों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सैलरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे.

महंगाई और बोनस का मुद्दा

प्रदर्शन में शामिल महिला श्रमिकों ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने बताया कि 20-25 रुपये की बढ़ोतरी का झुनझुना थमाया जाता है, जो इस कमरतोड़ महंगाई में नाकाफी है. बोनस के नाम पर भी कंपनियों में टालमटोल की जाती है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं.


 

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