2022 में परीक्षा हुई, 4 साल बाद भी फाइनल रिजल्ट का इंतजार... प्रयागराज में तैयारी कर रहे सुमित ने बताया युवाओं का दर्द

प्रयागराज में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे सुमित विश्वकर्मा की कहानी भर्ती प्रक्रिया में देरी की तस्वीर दिखाती है. 3500 रुपये के कमरे में तीन लोगों के साथ रहकर पांच साल से तैयारी कर रहे सुमित ने कई परीक्षाएं दीं, अपनी योग्यता बढ़ाई और अब आयोगों से समयबद्ध भर्ती, स्पष्ट शॉर्टलिस्टिंग और वेटिंग लिस्ट की मांग की है.

प्रयागराज में पांच साल से तैयारी कर रहे सुमित ने बताई युवाओं के संघर्ष की कहानी
प्रयागराज में पांच साल से तैयारी कर रहे सुमित ने बताई युवाओं के संघर्ष की कहानी
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Prayagraj Student Story: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के लिए प्रयागराज सिर्फ पढ़ाई का शहर नहीं, बल्कि उम्मीद और इंतजार का शहर भी है. सलोरी, राजापुर, अल्लापुर और दारागंज जैसे इलाकों में देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं. छोटी-सी जगह में रहकर पढ़ाई, खाना और परीक्षा की तैयारी के बीच कई युवाओं के कई साल निकल जाते हैं.

देवरिया के रहने वाले सुमित विश्वकर्मा भी ऐसे ही अभ्यर्थियों में शामिल हैं. वह 2021-22 के आसपास प्रयागराज आए थे और तब से यहीं रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. उनकी तैयारी का सिलसिला 2019 से शुरू हुआ था. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने और नौकरी की कोशिश के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी को अपना लक्ष्य बनाया. अब करीब पांच साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सुमित की तैयारी और अलग-अलग भर्तियों का इंतजार अभी जारी है.

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3500 रुपये के कमरे में तीन लोगों की जिंदगी

सुमित सलोरी में तीन लोगों के साथ एक कमरे में रहते हैं. कमरे का कुल किराया 3500 रुपये है. इसी छोटी-सी जगह में पढ़ाई, सोने और खाना बनाने का इंतजाम है. खाने के लिए कमरे में ही छोटा-सा किचन बना हुआ है. सुमित बताते हैं कि आमतौर पर दाल-चावल बनाकर काम चल जाता है. घर से भी आटा, चावल जैसी जरूरी चीजें आती रहती हैं. एक कमरे में रहना, पढ़ना, खाना बनाना और अगली परीक्षा की तैयारी भी करना है पिछले कई साल से यह सुमित की दिनचर्या का हिस्सा बना हुआ है.

इंजीनियरिंग के बाद B.Ed और फिर लाइब्रेरी साइंस

सुमित ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में ट्रेनिंग भी की थी. हालांकि वहां मिलने वाली आमदनी उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं थी. इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी. भर्तियों में देरी के बीच सुमित ने अपनी योग्यता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया. उन्होंने B.Ed किया और शिक्षक भर्ती की तैयारी की. इसके बाद लाइब्रेरी से जुड़ी भर्तियों के लिए बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई भी की.

2021 से कई परीक्षाएं दीं, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ

सुमित बताते हैं कि 2021 में वह RO/ARO की मुख्य परीक्षा देने प्रयागराज आए थे. भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. बाद में परीक्षा दोबारा हुई, लेकिन वह प्री परीक्षा में आगे नहीं बढ़ पाए. इसके बाद उन्होंने UPSSSC और UPPSC से जुड़ी कई परीक्षाओं में हिस्सा लिया. PET की परीक्षा भी लगातार देते रहे. उनके मुताबिक, पिछली PET परीक्षा में उन्हें 66 अंक मिले थे. सुमित ने जूनियर असिस्टेंट और लेखपाल समेत कई अन्य परीक्षाएं भी दी हैं. कुछ परीक्षाओं में वह अगले चरण तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन और परिणाम की प्रक्रिया का इंतजार उनके लिए लगातार बना रहा.

2022 की भर्ती के फाइनल रिजल्ट का इंतजार

सुमित जूनियर असिस्टेंट की 2022 की भर्ती का उदाहरण देते हैं. उनका कहना है कि परीक्षा और भर्ती के अलग-अलग चरणों के बाद भी अंतिम मेरिट का इंतजार बना हुआ है. इसी बीच 2024 में इसी पद से जुड़ी एक और भर्ती सामने आ गई. उनके मुताबिक, एक भर्ती के अभ्यर्थी पहले से प्रक्रिया में हैं और दूसरी भर्ती के उम्मीदवार भी अपने अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं. सुमित खुद दोनों प्रक्रियाओं से जुड़े रहे हैं.

उनका कहना है कि अगर पुरानी भर्ती समय पर पूरी हो जाए तो आगे की भर्ती में सीटों और अभ्यर्थियों को लेकर पैदा होने वाली स्थिति भी काफी हद तक साफ हो सकती है.

टेस्ट की तारीख बदली तो बिगड़ा शेड्यूल 

सुमित की परेशानी सिर्फ परीक्षा और रिजल्ट तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि एक टाइपिंग टेस्ट पहले मई-जून के आसपास होने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में इसकी तारीख दिसंबर तक आगे बढ़ गई. उनका कहना है कि टाइपिंग टेस्ट की तैयारी के लिए रोज काफी समय देना पड़ता है. जब किसी परीक्षा की तारीख बार-बार बदलती है तो अभ्यर्थी के लिए दूसरी परीक्षाओं की तैयारी का शेड्यूल बनाना मुश्किल हो जाता है. सुमित के मुताबिक, एक परीक्षा के अगले चरण का इंतजार करते हुए दूसरी परीक्षा की तैयारी करना पड़ती है. इससे कई बार दोनों की तैयारी प्रभावित होती है.

5-10 साल तक कौन युवा करता रहेगा इंतजार- सुमित

सुमित का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का सबसे बड़ा नुकसान अभ्यर्थी के समय को होता है. उनका सवाल है कि अगर किसी परीक्षा की प्रक्रिया पांच या दस साल तक चलती रहे तो कोई युवा लगातार उसी भर्ती के भरोसे कैसे बैठा रह सकता है. उनका कहना है कि परीक्षा से लेकर अंतिम परिणाम या नियुक्ति तक अगर बहुत लंबा समय लग जाए तो उम्मीदवार की उम्र बढ़ती रहती है और उसके सामने करियर के विकल्प भी सीमित होते जाते हैं. सुमित खुद इसका उदाहरण हैं. इंजीनियरिंग के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की, फिर B.Ed किया और इसके बाद लाइब्रेरी साइंस की पढ़ाई भी की. अलग-अलग भर्तियों के हिसाब से उन्हें लगातार अपनी तैयारी बदलनी पड़ी.

परिवार का दबाव भी है, लेकिन साथ भी पूरा

लगातार पांच-छह साल तैयारी करने के बाद परिवार और रिश्तेदारों की ओर से नौकरी को लेकर सवाल होना स्वाभाविक है. सुमित मानते हैं कि परिवार की तरफ से दबाव है, लेकिन उन्हें परिवार का पूरा समर्थन भी मिलता है. उनकी मां रोज कई बार फोन करती हैं और पढ़ाई, खाना और तैयारी के बारे में पूछती हैं. पिता अपने काम में व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनसे अपेक्षाकृत कम बातचीत होती है. सुमित बताते हैं कि कई बार वह खुद परिवार से कम बात करते हैं, ताकि नौकरी और रिजल्ट को लेकर बार-बार होने वाली चर्चा का दबाव कम रहे.

नौकरी के साथ शादी का दबाव भी

सुमित के मुताबिक, सरकारी नौकरी की तैयारी में कई साल निकल जाने के बाद सिर्फ करियर का दबाव नहीं रहता. उम्र बढ़ने के साथ शादी को लेकर भी परिवार की तरफ से सवाल आने लगते हैं. हालांकि इन सबके बावजूद सुमित फिलहाल तैयारी छोड़ने के बारे में नहीं सोच रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि किसी न किसी परीक्षा में उनका चयन जरूर होगा.

UPPSC और UPSSSC से क्या चाहते हैं?

सुमित की सबसे बड़ी मांग उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध करने की है. उनका कहना है कि सिर्फ भर्ती कैलेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है. जिस परीक्षा की तारीख तय हो, वह समय पर हो. परीक्षा के बाद परिणाम समय पर आए और चयन की पूरी प्रक्रिया भी तय समय सीमा के भीतर पूरी हो. सुमित के मुताबिक, तारीखों में बदलाव और भर्ती कैलेंडर में लगातार संशोधन से अभ्यर्थियों की तैयारी प्रभावित होती है. उन्हें बार-बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है.

शॉर्टलिस्टिंग को लेकर भी सवाल

सुमित ने PET जैसी परीक्षाओं के बाद होने वाली शॉर्टलिस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अलग-अलग भर्तियों में अगले चरण के लिए उम्मीदवारों को अलग-अलग अनुपात में बुलाया जाता है. उनके मुताबिक, कहीं 15 गुना, कहीं 40 गुना और कहीं इससे भी ज्यादा उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए लिया जाता है. ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच यह सवाल रहता है कि शॉर्टलिस्टिंग का स्पष्ट आधार क्या है. उनकी मांग है कि इसके लिए पहले से स्पष्ट और तय मानक होना चाहिए, ताकि उम्मीदवारों को अपनी स्थिति का अंदाजा रहे.

सुमित चाहते हैं वेटिंग लिस्ट का प्रावधान

सुमित भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट की व्यवस्था की भी मांग करते हैं. उनका तर्क है कि कई बार एक उम्मीदवार एक से ज्यादा परीक्षाओं में सफल हो जाता है. बाद में वह किसी एक जगह नियुक्ति लेता है तो दूसरी जगह की सीट खाली रह सकती है. ऐसी स्थिति में वेटिंग लिस्ट के जरिए दूसरे योग्य उम्मीदवार को मौका दिया जा सकता है. सुमित का मानना है कि इससे खाली पदों को भरने में मदद मिलेगी और योग्य उम्मीदवारों को दोबारा मौका मिल सकेगा.

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