राजा भईया के पिता उदय प्रताप सिंह फिर हुए हाउस अरेस्ट, जानें क्या है भद्री महल की किलेबंदी की वजह

प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह को मुहर्रम के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा नजरबंद (House Arrest) है.

राजा भईया के पिता
राजा भईया के पिता

सुनील यादव

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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह को एक बार फिर पुलिस प्रशासन ने नजरबंद (House Arrest) कर दिया है. मुहर्रम के मद्देनजर इलाके में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है. उदय प्रताप सिंह के साथ उनके 12 समर्थकों को भी भद्री महल के अंदर ही रहने का नोटिस थमाया गया है. महल के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और किलेबंदी जैसी स्थिति नजर आ रही है.

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25 जून से 26 जून तक बाहर निकलने पर पाबंदी

प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस के मुताबिक, राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह और उनके सहयोगियों को गुरुवार (25 जून 2026) सुबह 5:00 बजे से लेकर शुक्रवार (26 जून 2026) रात 9:00 बजे तक भद्री महल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी. पुलिस ने भद्री महल के मुख्य द्वार पर बकायदा कानूनी नोटिस चस्पा कर दिया है.

क्या है नजरबंदी की बड़ी वजह?

कुंडा में हर साल मुहर्रम के दौरान यह प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा का विषय बनती है. दरअसल, जिस रास्ते से मुहर्रम का ताजिया जुलूस निकलता है, उसी रास्ते पर शेखपुर गांव का एक हनुमान मंदिर पड़ता है. राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह की ओर से हर साल इसी समय इस मंदिर में बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन करने की घोषणा की जाती है.

जिला प्रशासन का मानना है कि एक ही समय और एक ही संवेदनशील इलाके में ताजिया जुलूस और भंडारा होने से तनाव या टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है. कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पुलिस व जिला प्रशासन हर साल भंडारे की अनुमति देने से इनकार करता है और एहतियात के तौर पर उदय प्रताप सिंह को हाउस अरेस्ट कर लेता है.

2012 से चला आ रहा है यह पूरा विवाद

यह मामला नया नहीं है, बल्कि इसकी कहानी साल 2012 से जुड़ी है. बताया जाता है कि कुंडा के शेखपुर गांव में एक बंदर की मौत के बाद वहां हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया था. इसके बाद मुहर्रम के दिन ही वहां भंडारे का आयोजन करने को लेकर विवाद शुरू हुआ. धीरे-धीरे यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया. तब से लेकर आज तक प्रशासन हर साल मुहर्रम के मौके पर अलर्ट रहता है और एहतियातन भद्री महल के बाहर कड़ा पहरा लगा दिया जाता है.

प्रशासन और पुलिस का क्या है कहना?

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम कुंडा और पुलिस अधिकारी लगातार भद्री महल और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एसडीएम कुंडा द्वारा आदेश जारी कर उदय प्रताप सिंह और उनके 12 सहयोगियों को 25 जून सुबह 5:00 बजे से 26 जून रात 9:00 बजे तक आवासीय परिसर में ही सीमित रखने का निर्देश दिया गया है ताकि विधि व्यवस्था प्रभावित होने की कोई आशंका न रहे. प्रशासन का साफ तर्क है कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे इलाके में अमन-चैन बनाए रखने के लिए की गई है.


 

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