अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी को सनातनी पिच पर घेरने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक बयानों का दौर जारी है. इसी गहमा-गहमी के बीच, भाजपा के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के एक बयान ने इस आग में घी का काम किया है.
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'जानता बहुत कुछ हूं, पर बोल नहीं सकता'
अपनी बेबाक और दबंग छवि के लिए मशहूर बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ ऐसा कहा जिसने सबको चौंका दिया. जब पत्रकारों ने उनसे नीट (NEET) पेपर लीक और राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों पर सवाल पूछा तो उन्होंने दावा किया कि वो जानते तो बहुत कुछ हैं लेकिन बोल नहीं सकते हैं. बोलेंगे तो परेशान हो जाएंगे.
उन्होंने कहा, "अगर मैं सच बोलूंगा तो बहुत चोट लगेगी और मैं विवाद में फंस जाऊंगा, क्योंकि वे लोग बहुत ताकतवर हैं. इसलिए डर के मारे मैं सच नहीं बोल रहा हूं."
हमेशा 'दबदबा था और रहेगा' का नारा देने वाले बृजभूषण के मुंह से डर की ऐसी बात सुनकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है. सोशल मीडिया पर लोग इस बयान को जमकर शेयर कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर बाहुबली नेता को किसका डर सता रहा है.
भाजपा नेता ने ही पीएम मोदी को लिखा खत
इस विवाद में ट्विस्ट तब आया जब भाजपा के अपने ही नेता और पार्टी प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर दी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आधिकारिक पत्र लिखकर मांग की है कि राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान में गड़बड़ी के आरोपों की जांच सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए. उन्होंने यह भी कहा कि इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि राम भक्तों का भरोसा मंदिर ट्रस्ट पर बना रहे.
विपक्ष के क्या हैं आरोप?
इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी. उन्होंने 7 जून को आरोप लगाया था कि मंदिर के दान-पात्रों से करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब है. इसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी दान की गिनती में बड़ी धांधली का दावा किया. सपा नेता पवन पांडे ने तो यहां तक आशंका जताई कि दान पेटी से करीब 7.5 करोड़ रुपये गायब हुए हैं.
इसके बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाने लगा कि मंदिर से पैसे चुराने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनसे कुछ नकदी भी बरामद हुई है.
पुलिस और मंदिर ट्रस्ट ने दावों को किया खारिज
हालांकि, इन सभी आरोपों को प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सिरे से खारिज कर दिया है. अयोध्या के पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्पष्ट किया कि चोरी और गिरफ्तारी की खबरें पूरी तरह से अफवाह और निराधार हैं.
दूसरी ओर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों को झूठा बताया है. ऑडिट टीम का कहना है कि मंदिर के खातों का नियमित रूप से ऑडिट किया जा रहा है और अब तक दान-पात्रों की आय में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या कमी सामने नहीं आई है. पाई-पाई का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जा रहा है.
विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाने पर अड़ा है, वहीं ट्रस्ट इसे मंदिर की छवि खराब करने की साजिश बता रहा है. अब देखना यह है कि बृजभूषण शरण सिंह की यह रहस्यमयी चुप्पी आगे क्या रंग लाती है.
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