Uttar Bharat: कौन हैं चंपत राय? जो राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चर्चा में आए, जानिए केमिस्ट्री प्रोफेसर से ट्रस्ट महासचिव बनने तक तक की कहानी

Ram Mandir Donation Controversy : राम मंदिर में कथित दान घोटाले और 8 करोड़ रुपये की चोरी के आरोपों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी के पूर्व सांसद विनय कटियार ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आखिर चंपत राय कौन हैं और उनका अब तक का सफर कैसा रहा, जानिए पूरी कहानी.

कौन हैं चंपत राय?
कौन हैं चंपत राय?

राजू झा

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Champat Rai News: अयोध्या का भव्य राम मंदिर एक बार फिर से देश भर में भारी चर्चा का विषय बन गया है. इस बार सुर्खियां मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में कथित चोरी तथा वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर हैं. शुरुआती खबरों और आरोपों के मुताबिक, राम मंदिर के चढ़ावे से 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की चोरी हुई है. इस बेहद संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 5 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है. वहीं, इस कथित चोरी के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद विनय कटियार ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पूरे राजनीतिक और धार्मिक हलके में नई सनसनी फैला दी है.

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दरअसल, विनय कटियार ने इसके लिए सीधे राम मंदिर मुख्य ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को जिम्मेदार ठहराया दिया है. विनय कटियार ने आरोप लगाते हुए कहा है कि चंपत राय राम मंदिर के दान का पैसा अपने घर लेकर चले जाते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर चंपत राय कौन हैं और कैसे एक केमिस्ट्री प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव बनने तक उन्होंने अपना सफर तय किया.

पहले जानते हैं विनय कटियार ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर बीजेपी के पूर्व सांसद विनय कटियार का बयान सामने आया है. उन्होंने चंपत राय के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, "एक साथ उस समय का सारी चीज ले जाना ये ठीक नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि चढ़ावा कहां लेकर के गए चंपत राय? तो उन्होंने दावा किया कि कार सेवकपुरम जहां वे रहते हैं, जो कभी हमारी कोठी हुआ करती थी. उन्होंने कहा कि अगर एक दिन का भी कोई चढ़ावा लेकर चला जाएगा तो लंबी रकम जाएगी."

कौन हैं चंपत राय?

इस बड़े आरोप के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर चंपत राय कौन हैं, जो राम मंदिर विवाद को लेकर अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. चंपत राय राम मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर बनने और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान हमेशा सबसे आगे रहे हैं. 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में हुए ऐतिहासिक राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाले मुख्य चेहरों में वह शामिल थे. आजादी से ठीक पहले नवंबर 1946 में जन्मे चंपत राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं. वह अपने 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आते हैं.

RSS से जुड़े, केमिस्ट्री के प्रोफेसर बने

चंपत राय बहुत ही कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे. उन्होंने संघ के विचारों और नीतियों का जमीन पर खूब प्रचार-प्रसार किया. अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाना शुरू किया और वहीं नौकरी करने लगे.

चंपत राय का कैसे हुआ अयोध्या आगमन?

चंपत राय के बिजनौर से अयोध्या आने की कहानी साल 1991 में शुरू हुई थी. इस दौरान चंपत राय क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में पहली बार अयोध्या पहुंचे. इसके बाद संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया. साल 1996 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद (विएचपी) का केंद्रीय मंत्री बनाया गया. इसके बाद साल 2002 में वह संयुक्त महामंत्री बने और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री के पद तक पहुंचे. चंपत राय ने कभी शादी नहीं की और वह अपने गृह नगर या घर भी बहुत कम ही जाते थे.

कानूनी लड़ाई और 'रामलल्ला के पटवारी' का सफर

अयोध्या में रामलल्ला के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर चले लंबे सामाजिक आंदोलन के साथ-साथ अदालती और कानूनी लड़ाई में चंपत राय ने बेहद अहम और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी. चंपत राय ने ही राम जन्मभूमि विवाद से जुड़ी एक-एक फाइलों, दस्तावेजों और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बरसों तक अपने पास पूरी हिफाजत से रखा. वह अदालती सुनवाई के दौरान हर दिन वकीलों को कोर्ट में पेश करने के लिए नए-नए साक्ष्य और सबूत उपलब्ध कराते थे. वकीलों के साथ लगातार समन्वय करना, हर सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहना और लंबे समय तक धैर्य बनाए रखने की जिम्मेदारी को उन्होंने बखूबी अंजाम दिया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मिली ट्रस्ट की कमान

अदालती लड़ाई और मंदिर निर्माण के लिए चंपत राय के इस बेजोड़ समर्पण को देखते हुए लोग उन्हें प्यार से 'रामलल्ला का पटवारी' कहकर भी पुकारने लगे. साल 2019 में जब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने राम जन्मभूमि के पक्ष में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया, तो मंदिर निर्माण के लिए गठित हुए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' ने चंपत राय की काबिलियत को देखते हुए उन्हें सबसे अहम जिम्मेदारी सौंपी. साल 2020 में चंपत राय को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया, जिसके बाद पूरा निर्माण कार्य और प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुआ.

जानिए क्यों छोड़ी प्रोफेसर की नौकरी?

अब बात करते हैं कि आखिर चंपत राय ने केमिस्ट्री के प्रोफेसर जैसी सम्मानीय और सुरक्षित नौकरी क्यों छोड़ दी. साल 1975 में जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी की घोषणा की थी, तब चंपत राय कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थे. आपातकाल के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सीधे कॉलेज पहुंच गई. तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई इमरजेंसी के दौरान राम मंदिर आंदोलन को लेकर ही गिरफ्तार किए गए थे.

गिरफ्तारी के बाद चंपत राय करीब-करीब 18 महीने तक उत्तर प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद रहे. इस दौरान प्रशासन द्वारा उन्हें एक से दूसरे जिले की जेलों में ट्रांसफर किया जाता रहा. जेल की इस लंबी अवधि के दौरान उनका संकल्प कमजोर होने की बजाय और ज्यादा मजबूत हो गया और वह एक पूरी तरह से बदले हुए दृढ़ निश्चयी व्यक्ति के रूप में बाहर आए. आपातकाल खत्म होने पर जब उन्हें जेल से रिहा किया गया, तो वह वापस कभी अपने घर लौटकर नहीं गए. उन्होंने अपनी प्रोफेसर की नौकरी से भी तुरंत इस्तीफा दे दिया और अपना पूरा जीवन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के लिए समर्पित कर दिया.

चंपत राय ने खुद बताया था- कैसे होता है पैसों का ऑडिट

भले ही आज पूर्व बीजेपी सांसद विनय कटियार उन पर बेहद गंभीर आरोप लगा रहे हों, लेकिन कुछ समय पहले खुद चंपत राय ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया था कि राम मंदिर में आने वाले दान और पैसों की देखरेख कैसे की जाती है. चंपत राय ने कहा था, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अपने भिन्न-भिन्न कार्यों का ऑडिट समय-समय पर करता रहता है. हुंडी (दानपात्र) काउंटिंग कमरे का ऑडिट भी होता है. हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी गण, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं. यह कार्य कई दिनों तक चलता है. यही कार्य आजकल हो रहा है. कोई भी उल्लेखनीय बात किसी के भी ध्यान में अभी तक नहीं आई है."

अब तक 5 गिरफ्तार, ढाई करोड़ की रिकवरी

इस पूरे मामले के वर्तमान स्टेटस की बात करें तो राम मंदिर की दान राशि के कथित गबन के आरोप में पुलिस ने अब तक कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है. जांच एजेंसियों ने इन आरोपियों के पास से अब तक ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा की नकद राशि भी रिकवर (बरामद) कर ली है. हालांकि, पुलिस और कानूनी दस्तावेजों में इस मामले में सीधे तौर पर चंपत राय का नाम कहीं भी सामने नहीं आया है. विवाद के बढ़ते स्तर को देखते हुए इस पूरे मामले की कमान और जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंप दी गई है. अब हर किसी की नजरें एसआईटी की आने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं कि इस बड़े घोटाले के पीछे असली चेहरा किसका है.

 

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