'चंपत राय को दी थी 200 किलो चांदी, 5 साल बाद भी नहीं मिली रसीद', राम मंदिर दान पर सिंधी समाज का बड़ा दावा

अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर जारी विवाद के बीच विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मनवानी ने दावा किया है कि उनके समाज द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दी गई 200 किलो चांदी की रसीद 5 साल बाद भी नहीं मिली है.

Ram Mandir Dispute
Ram Mandir Dispute

न्यूज तक डेस्क

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अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी विवादों के बीच एक नया और बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है. विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मनवानी ने आरोप लगाया है कि उनके समाज की ओर से राम मंदिर निर्माण के लिए करीब 200 किलो चांदी दान की गई थी, लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें आज तक इसकी रसीद नहीं मिली है. इस दावे के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के लेखा-जोखा और पारदर्शिता पर एक बार फिर नए सवाल खड़े हो गए हैं.

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चंपत राय को मंदिर परिसर में सौंपी थी चांदी

विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मनवानी का दावा है कि उन्होंने यह 200 किलो चांदी किसी और को नहीं, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को खुद सौंपी थी. मनवानी के मुताबिक, "हम चंपत राय जी से पहले दिल्ली में मिले, फिर अयोध्या में मिले. इसके बाद अयोध्या के मंदिर परिसर के अंदर ही उन्हें यह 200 किलो चांदी दी गई थी. हम तो सिर्फ चंपत राय जी को जानते हैं, उनकी टीम में कौन है हमें नहीं पता. यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह हमें इसकी रसीद दिलवाएं."

15 देशों के सिंधी समाज ने जुटाया था दान

राजू मनवानी ने बताया कि इस दान में दुनिया भर के सिंधी समाज की श्रद्धा जुड़ी थी. करीब 15 देशों के 200 सिंधी परिवारों ने मिलकर किसी ने एक किलो, किसी ने दो तो किसी ने पांच किलो चांदी का योगदान दिया था. उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इतना बड़ा दान देने के बावजूद जब अयोध्या में राम मंदिर की ओपनिंग (प्राण प्रतिष्ठा) हुई, तो सिंधी समाज को एक निमंत्रण पत्र तक नहीं भेजा गया.

पीएम मोदी और सीएम योगी से की जांच की मांग

राजू मनवानी ने कहा कि दान देने के बाद वे इस बात को भूल चुके थे, लेकिन हाल ही में टीवी और मीडिया में मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठ रहे सवालों और कथित घोटाले की खबरों को देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. मनवानी ने कहा, "योगी साहब ने जो एसआईटी (SIT) बनाई है, हमें उस पर पूरा भरोसा है कि सच सामने आ जाएगा. हम जानना चाहते हैं कि हमारी चांदी सही जगह इस्तेमाल हुई है या उसे गलाकर कहीं और लगा दिया गया है, ताकि भविष्य में दान देते वक्त हमें ऐसा दुख न हो."

ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस नए और गंभीर दावे को लेकर फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, इस खुलासे ने मंदिर में मिले दान की रसीद प्रणाली और पारदिर्शता पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है. अब देखना यह होगा कि ट्रस्ट इस मामले में क्या सफाई पेश करता है.

 

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