85 बार चढ़ावा चोरी करता दिखा अविनाश... कब चंपत राय को पता चली पूरी बात? जानिए राम मंदिर चोरी की कहानी

संतोष शर्मा

• 10:31 AM • 26 Sep 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया और गवाह बनाया गया है. जांच में 133 गवाहों का जिक्र है. आरोपियों से 79.85 लाख रुपये बरामद हुए हैं.

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के पैसों की चोरी के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. जांच में चोरी से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है. वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है. तीनों को मामले में गवाह बनाया गया है.

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चार्जशीट में चोरी की शुरुआत से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी तक की पूरी जानकारी दी गई है. पुलिस के मुताबिक 3 और 4 जून 2026 को चढ़ावे के पैसे चोरी करने की घटनाएं सामने आई थीं.

3 जून को पहली बार पकड़ी गई चोरी

पुलिस की जांच के अनुसार 3 जून को अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा चढ़ावे के पैसे चोरी करते पकड़े गए थे. गणनाकर्मी मदन गोपाल निगम ने इन्हें नोटों की गड्डी छिपाते हुए देखा था. इसके अगले दिन 4 जून को भी चोरी की घटना सामने आई. गणना कर्मी संत प्रसाद वर्मा ने अविनाश शुक्ला को चोरी करते देख लिया. इसके बाद मदन गोपाल निगम और संत प्रसाद वर्मा की शिकायत पर गेट पर चेकिंग शुरू की गई. चेकिंग के दौरान अविनाश शुक्ला ने चोरी किए गए 2 लाख 25 हजार रुपये बाथरूम में छिपा दिए. तलाशी के दौरान यह रकम बरामद कर ली गई.

4 जून की रात चंपत राय को मिली जानकारी

चार्जशीट के मुताबिक 4 जून की रात चंपत राय को चोरी की जानकारी दी गई थी. उस समय वह दिल्ली से ट्रेन के जरिए अयोध्या आ रहे थे. उन्हें चोरी से जुड़े वीडियो भी भेजे गए थे.

5 जून को अयोध्या पहुंचने के बाद चंपत राय ने कारसेवकपुरम स्थित आवास पर अनिल मिश्रा और गोपाल राव के साथ बैठक की. इस दौरान लैपटॉप पर चढ़ावे की चोरी से जुड़े कई सीसीटीवी फुटेज देखे गए. पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि चंपत राय ने ये फुटेज देखे थे. इसके बाद 7 जून को उन्होंने एक बयान जारी किया था.

7 जून के बयान का भी चार्जशीट में जिक्र

चार्जशीट में चंपत राय की ओर से 7 जून को दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया है. इसमें उन्होंने कहा था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है. इस प्रक्रिया में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. उन्होंने कहा था कि ऑडिट की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और उस समय भी यह काम जारी था. उनके बयान के मुताबिक उस समय तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई थी. हालांकि पुलिस की चार्जशीट के अनुसार 3 जून को चोरी पहली बार पकड़ी गई थी. 4 जून को चंपत राय को इसकी जानकारी मिल गई थी और 5 जून को उन्हें चोरी के सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए गए थे.

13 जून को बनी SIT

चोरी की घटना के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दी. इसके बाद 25 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में एफआईआर दर्ज कराई गई. यह एफआईआर कृष्ण मोहन की ओर से दर्ज कराई गई थी.

पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया. दोनों को मामले में गवाह बनाया गया. गोपाल राव को भी आरोपी नहीं बनाया गया और उन्हें गवाह के तौर पर शामिल किया गया है.

चार्जशीट में 133 गवाह

पुलिस की चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का जिक्र है. इनमें एफआईआर दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन भी शामिल हैं. चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के अलावा कोतवाली के इंस्पेक्टर, राम जन्मभूमि थाने के इंस्पेक्टर और सीओ अयोध्या समेत 27 पुलिसकर्मियों को भी गवाह बनाया गया है.

CCTV में बार-बार चोरी करते दिखा अविनाश

जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला सबसे ज्यादा बार चोरी करते दिखाई दिया. पुलिस के मुताबिक वह 85 बार चढ़ावा चोरी करता नजर आया. इसके अलावा चार बार चोरी में मदद करते हुए भी दिखाई दिया. करुणेश पांडे ने खुद दो बार चोरी की. वह 68 बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया.

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव ने 15 अप्रैल 2026 से 3 जून 2026 के बीच 16 बार खुद चोरी की. वह 19 बार चोरी में मदद करता भी दिखाई दिया. यानी करीब 50 दिन की नौकरी के दौरान वह 35 बार चोरी करने या चोरी में मदद करने में शामिल रहा. लव कुश मिश्रा ने एक बार खुद चोरी की और 52 बार चोरी में मदद की. अनुकल्प मिश्रा 56 बार चोरी में मदद करता दिखाई दिया. रमाशंकर मिश्रा ने एक बार चोरी की.

रिटायर्ड बैंक कर्मचारी की भी भूमिका

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव भी इस मामले में शामिल था. उसने 25 मई और 30 मई को अविनाश शुक्ला की चोरी में मदद की थी. पुलिस के अनुसार सुभाष श्रीवास्तव के कहने पर चढ़ावा चोरी करने वाले आरोपियों की सुरक्षा गार्ड आने-जाने के दौरान चेकिंग नहीं करते थे. ज्यादा रकम चोरी करने के लालच में आरोपियों ने उसे भी अपने साथ मिला लिया था. सुभाष श्रीवास्तव 7 जनवरी 2022 को रिटायर हुआ था. उसे दानपात्र से मिलने वाले चढ़ावे को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी.

नौकरी लगने के बाद मनीष भी चोरी में शामिल

जांच में सामने आया कि मनीष यादव की अप्रैल 2026 में नौकरी लगने के बाद सभी आरोपी मिलकर बड़ी रकम चोरी करने लगे थे. पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों के पास से कुल 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद किए हैं. वहीं मामले में शामिल सभी आठ आरोपियों के बैंक खातों में कुल 98 लाख 30 हजार रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है.

पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर जांच पूरी कर ली है. वहीं चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है. तीनों को मामले में गवाह के तौर पर शामिल किया गया है.

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