श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव हुए हैं. हाल ही में राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और आरोपों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था. इसके अलावा ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप सिंह के निधन के बाद ट्रस्ट में तीन प्रमुख पद खाली चल रहे थे.
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इन खाली पदों को भरने और ट्रस्ट के पुनर्गठन के लिए अयोध्या स्थित मणिराम दास छावनी में एक ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें तीन नए प्रमुख ट्रस्टियों के नामों पर आधिकारिक मुहर लगाई गई है.
कौन हैं 3 नए ट्रस्टी?
1. डॉ. निर्मला यादव (फिरोजाबाद, यूपी)
- ट्रस्ट में शामिल नए चेहरों में सबसे अधिक चर्चा डॉ. निर्मला यादव की हो रही है.
- परिचय: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले (शिकोहाबाद) की रहने वाली डॉ. निर्मला यादव एक जाने-पहचानी शिक्षाविद हैं.
- योगदान: वे शिकोहाबाद के प्रसिद्ध एमजी पॉलीबॉल डिग्री कॉलेज और बीडीएम डिग्री कॉलेज की प्राचार्या (Principal) रह चुकी हैं
- अनुभव: हिंदी और संस्कृत विषय में परास्नातक व पीएचडी धारक. डॉ. यादव का शिक्षा क्षेत्र में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव रहा है. वे 15 वर्षों तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्या भी रही हैं.
- भूमिका: राम मंदिर ट्रस्ट में एक महिला शिक्षाविद के रूप में उनकी नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है. अब वे मंदिर के शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स, प्रशासनिक गतिविधियों और प्रबंधन में सीधी भूमिका निभाएंगी.
2. मदन मोहन पांडे (अयोध्या, यूपी)
- परिचय: अयोध्या के निवासी मदन मोहन पांडे वरिष्ठ अधिवक्ता और उत्तर प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) रह चुके हैं.
- कानूनी लड़ाई: राम मंदिर आंदोलन और कानूनी लड़ाई में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है. 1990 से 2019 तक उन्होंने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रामलला विराजमान और पूज्य महंत श्री रामचंद्र परमहंस दास जी की ओर से मुख्य पैरोकार के रूप में पैरवी की थी.
3. महेश भागचंद का (नई दिल्ली)
- परिचय: दिल्ली के रहने वाले 68 वर्षीय महेश भागचंद का प्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवी हैं.
- संबंध व पृष्ठभूमि: वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिवंगत दिग्गज नेता अशोक सिंघल के नजदीकी रिश्तेदार बताए जाते. उनका परिवार शुरुआत से ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा है.
- सांस्कृतिक कार्य: वे 'वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम' की कार्यकारिणी के सदस्य हैं तथा श्री राम वन गमन यात्रा के 292 पवित्र तीर्थ स्थलों में 'श्री राम स्तंभ' की स्थापना में भी संलग्न रहे हैं.
पेशेवर CEO की नियुक्ति की भी तैयारी
9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित यह ट्रस्ट 70 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण, पूजा-अर्चना और दान का प्रबंधन संभालता है. चंपत राय के इस्तीफे और नए ट्रस्टियों की एंट्री के साथ ही ट्रस्ट अब इतिहास में पहली बार एक पेशेवर सीईओ (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहा है. जल्द ही औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन निर्णयों की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.
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