Rampur SP Farewell: रामपुर में एक अफसर की विदाई थी… लेकिन माहौल ऐसा था जैसे घर का कोई अपना जा रहा हो. करीब डेढ़ साल तक जिले की कमान संभालने वाले एसपी विद्यासागर मिश्र का तबादला हो गया. उन्हें अब सीतापुर की 11वीं वाहिनी पीएसी में भेजा गया है. पुलिस लाइन में विदाई समारोह रखा गया. शुरुआत सब कुछ नार्मल नजर आ रहा था..औपचारिक भाषण, तालियां, धन्यवाद… लेकिन कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह बदल गया.
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बोलते-बोलते रुक गई आवाज
जब एसपी साहब मंच पर पहुंचे तो उन्होंने बोलना शुरू किया. लेकिन कुछ ही शब्दों के बाद उनकी आवाज भर्रा गई. उन्होंने कहा- "रामपुर मेरे लिए सिर्फ पोस्टिंग नहीं रहा… ये एक परिवार जैसा बन गया है." बस इतना कहना था कि पूरा हॉल खामोश हो गया.
"सर… मत जाइए"
समारोह खत्म होने के बाद वो नीचे उतरे और अपने स्टाफ के बीच पहुंचे. खासकर महिला सिपाहियों के बीच जो नजारा था, वो किसी को भी भावुक कर दे. एक महिला सिपाही ने हाथ जोड़कर कहा- "सर… मत जाइए…". एसपी साहब हल्के से मुस्कुराए- "अरे… ऐसे कैसे नहीं जाएंगे… लेकिन आते रहेंगे."
"सुनो तनु, रोते नहीं बेटा... आता रहूंगा."
समारोह के बाद का सबसे भावुक पल तब आया जब एसपी साहब महिला पुलिसकर्मियों के बीच पहुंचे. महिला सिपाहियों ने उन्हें घेर लिया और उनसे न जाने की जिद करने लगीं. एक सिपाही ने जब रोते हुए कहा 'सर मत जाइए', तो एसपी साहब ने पिता की तरह उसके सिर पर हाथ रखा और कहा, "रोते नहीं बेटा, आता रहूंगा."
तभी उन्होंने पीछे खड़ी महिला सिपाही तनु को आवाज देकर पास बुलाया. तनु की आंखों में भी आंसू थे, जिसे देख एसपी साहब ने बड़े अपनेपन से कहा, "सुनो तनु, रोते नहीं बेटा... आता रहूंगा." यह देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.
सख्त भी थे और मददगार भी
सहकर्मियों ने बताया कि विद्यासागर मिश्र ड्यूटी के दौरान जितने सख्त थे, व्यक्तिगत तौर पर उतने ही मददगार और संवेदनशील भी. यही वजह थी कि विदाई के वक्त न केवल पुलिसकर्मी बल्कि पूरा स्टाफ भावुक नजर आया.
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