ASP अनुज चौधरी पर FIR वाले आदेश की खबर सुनते ही सपा सांसद जियाउर रहमान आया रिएक्शन, देखें क्या कहा

ASP Anuj Chaudhary News: संभल हिंसा मामले में कोर्ट के सख्त रुख ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. सीजीएम कोर्ट द्वारा ASP अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश के बाद सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है.

ASP Anuj Chaudhary News
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अभिनव माथुर

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 ASP Anuj Chaudhary FIR: संभल हिंसा मामले में नया कानूनी मोड़ आने के बाद सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. दरअसल, संभल की सीजीएम कोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी और करीब 15 से 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. अब इस मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने न्यायपालिका के इस फैसले का स्वागत किया है. बर्क ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश देते हुए लिखा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. चाहे वह किसी भी पद पर हो या वर्दी में हो. उन्होंने कोर्ट के आदेश को एक ऐतिहासिक फैसला करार दिया है.

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जियाउर रहमान बर्क ने क्या कहा?

सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कोर्ट के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश यह साबित करता है कि अफसर हो या आम आदमी, कानून तोड़ने वाले को बख्शा नहीं जाएगा. बर्क के मुताबिक, जिन अधिकारियों ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है, उन्हें अब अदालत के जरिए जवाब देना होगा. उन्होंने इसे जुल्म के खिलाफ हक की लड़ाई बताया और कहा कि भले ही इंसाफ मिलने में वक्त लगा, लेकिन कोर्ट का यह कदम सराहनीय है.

कोर्ट ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश

संभल के चंदौसी स्थित सीजीएम कोर्ट ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और करीब 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. यह आदेश आलम नाम के एक युवक के पिता यामीन की याचिका पर आया है. आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल हिंसा के दौरान पुलिस ने जान से मारने की नीयत से आलम पर फायरिंग की थी. याचिका में कहा गया कि आलम सामान बेचने निकला था, तभी पुलिस की गोलियां उसकी पीठ और हाथ में लगीं. 

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पुलिस प्रशासन का रुख और एसपी का बयान

मामले में संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि 'संभल हिंसा के मामले में ज्यूडिशल इंक्वारी पहले ही हो चुकी है जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने आदेश किया है उनकी जांच पूरी हो चुकी है. इसलिए हम इस मामले में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील करेंगे.'

क्या था पूरा संभल हिंसा विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ संभल की 16वीं सदी की जामा मस्जिद का सर्वे है. दरअसल कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. इसमें दावा किया गया था कि संभल की 16वीं सदी की जामा मस्जिद मूल रूप से एक प्राचीन हरिहर मंदिर के खंडहरों पर बनी है. काेर्ट ने इसी दावे की जांच के लिए सर्वे करवाने का आदेश दिया. इसी क्रम में 19 नवंबर को पहला सर्वे किया गया. लेकिन 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान माहौल गरमा गया. सर्वे के समय मस्जिद के पास भारी भीड़ इकट्ठा हो गई. इस दौरान अफवाहें उड़ी कि मस्जिद के अंदर खुदाई हो रही. ऐसे में इलाके लोगों का गुस्सा बढ़ गया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस दाैरान 4 लोगों की मौत हो गई वही लगभग 29 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए.

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