Who is Sangeeta Yadav: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए अपनी बिसात बिछा दी है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद और चौरीचौरा की पूर्व विधायक संगीता यादव को राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. बीजेपी के इस कदम को सीधे तौर पर यादव वोट बैंक में सेंध लगाने और सपा के सियासी दांव का जवाब देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
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चौरीचौरा से राज्यसभा और अब राष्ट्रीय संगठन तक का सफर
20 जुलाई 1981 को मुंबई के बोरीवली में जन्मी संगीता यादव ने कानून की पढ़ाई करते हुए एलएलबी की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और धरातल पर संगठन के काम में जुट गईं. साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें गोरखपुर जिले की चौरीचौरा सीट से उम्मीदवार बनाया. इस चुनाव में संगीता यादव ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हराकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा.
विधायक के रूप में अपने 5 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाया. उनकी मेहनत और निष्ठा को देखते हुए पार्टी ने 2022 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनाकर दिल्ली भेजा. राज्यसभा में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात प्रखरता से रखी.
अखिलेश के PDA का तोड़ और बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
समाजवादी पार्टी बीते लंबे समय से पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के समीकरण को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बना रही है. सपा के इस सियासी दांव को कमजोर करने के लिए बीजेपी लगातार रणनीति बना रही थी. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने एक प्रमुख यादव चेहरे को पार्टी की राष्ट्रीय टीम में अहम स्थान दिया है.
बीजेपी इस फैसले के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि यादव समाज पर केवल समाजवादी पार्टी का एकछत्र अधिकार नहीं है. पार्टी यादव समाज के प्रमुख और शिक्षित नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाकर इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
युवाओं और योजनाओं को लेकर स्पष्ट सोच
संगीता यादव ने अपने राजनीतिक संदेशों में हमेशा देश के युवाओं और विकास योजनाओं पर जोर दिया है. उनका मानना है कि युवाओं को सरकारी योजनाओं की सही जानकारी होनी चाहिए ताकि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के साथ देश के विकास में सहभागी बन सकें.
चौरीचौरा की जमीनी राजनीति से शुरू हुआ संगीता यादव का यह सफर अब राष्ट्रीय संगठन तक पहुंच चुका है. यह पदोन्नति न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का परिणाम है, बल्कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की आने वाले चुनावों को लेकर बनाई जा रही नई सोशल इंजीनियरिंग की एक अहम कड़ी भी है.
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