उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों धर्म और राजनीति का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. समाजवादी पार्टी (सपा) के गढ़ सैफई से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहली बार सैफई पहुंचे, जहां मुलायम सिंह यादव के पूरे परिवार ने उनका पलक-पावड़े बिछाकर भव्य स्वागत किया.
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मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने खुद शंकराचार्य की आरती उतारी और उन पर फूलों की बारिश कर आशीर्वाद लिया. इस दौरान सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, सांसद आदित्य यादव, तेज प्रताप यादव सहित पूरा यादव परिवार वहां मौजूद रहा.
कन्नौज विवाद के बाद सैफई पहुंचे शंकराचार्य
शंकराचार्य का यह सैफई दौरा हाल ही में उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुए एक विवाद के ठीक बाद हुआ है. आरोप है कि कन्नौज में जिला प्रशासन ने शंकराचार्य के रात्रि विश्राम के लिए एक प्राइवेट स्कूल की परमिशन कथित तौर पर रद्द कर दी थी, जिसके चलते उन्हें सड़क किनारे एक अस्थाई शिविर में रात बितानी पड़ी थी. इस घटना पर अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सरकार का 'अधर्म' बताया था.
जब इसके बाद शंकराचार्य सैफई पहुंचे, तो सपा परिवार ने इस मौके को हाथों-हाथ लिया. शंकराचार्य ने अखिलेश यादव के निर्माणाधीन स्कूल कैंपस में स्थापित विशाल भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का विधि-विधान से पूजन किया और वहां मौजूद लोगों को गौ माता की रक्षा का संकल्प दिलाया.
शंकराचार्य ने की सैफई परिवार की तारीफ
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खुले मंच से मुलायम सिंह यादव के परिवार की जमकर सराहना की [01:56]. उन्होंने कहा, "मैं जिंदगी में पहली बार सैफई आया हूं, लेकिन पूरे प्रदेश में जब हम घूम रहे हैं, तो सैफई के नेतृत्व में चलने वाली पार्टी (सपा) गाय के मामले में सबसे आगे दिखाई दे रही है. यह बात मैं प्रमाणित रूप से कह सकता हूं."
शंकराचार्य के इस बयान से गदगद शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया है और उनके द्वारा चलाए जा रहे गौ माता रक्षा अभियान में पूरा परिवार सहयोग करेगा.
क्या हैं इस मुलाकात के सियासी मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस मुलाकात के पीछे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति और बड़ा सियासी संदेश छिपा है:
'सॉफ्ट हिंदुत्व' का कार्ड: भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रखर हिंदुत्व के मुकाबले अखिलेश यादव अब शंकराचार्य के जरिए अपने 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के कार्ड को आगे बढ़ा रहे हैं. कृष्ण मूर्ति के पूजन और गौ रक्षा के संकल्प के जरिए सपा खुद को सनातन विरोधी के ठप्पे से दूर करना चाहती है.
ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (मूल नाम उमाशंकर पांडे) ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. पिछले कुछ समय से माघ मेले में प्रशासन से हुए टकराव और पॉक्सो केस दर्ज होने के बाद अखिलेश यादव लगातार उनके साथ मजबूती से खड़े नजर आए हैं. सपा इस नरेटिव को हवा दे रही है कि बीजेपी के राज में ब्राह्मणों और संतों का अपमान हो रहा है, जबकि ब्राह्मणों का असल सम्मान सिर्फ सपा ही कर सकती है. अखिलेश यादव अपने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में उन अगड़ी जातियों (विशेषकर ब्राह्मणों) को भी जोड़ने की बात कह रहे हैं जो सरकार से नाराज हैं.
माघ मेले से लेकर अब तक शंकराचार्य और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों पर तकरार देखने को मिली है. ऐसे में सैफई में उमड़ी सपाईयों की भीड़ और डिंपल यादव द्वारा शंकराचार्य की उतारी गई आरती ने सूबे की राजनीति में एक नया नैरेटिव सेट कर दिया है.
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