Uttar Pradesh BLO News: देशभर में कई राज्यों में SIR का काम जारी है. इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी BLO इस काम में लगे हुए हैं. लेकिन इस बीच बड़ी खंख्या में BLO के मोत की खबर भी समाने आ रही है. इस मामले को विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित तमाम नेता तक उठा चुके हैं. अब ताजा मौत का मामला यूपी के बिजनौर और मुरादाबाद से सामने आया है. यहां दौ बीएलओ की मौत की खबर से सनसनी फैली हुई है. दोनों मामलों में परिवार ने तनाव और काम को वजह बताया है. वहीं, प्रशासन इसे प्राकृतिक कारण और व्यक्तिगत परिस्थिति बता रहा है.
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महिला BLO की अचानक मौत
पहला मामला बिजनौर जिले के धामपुर में 56 वर्षीय शोभारानी का है. शोभा इस समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ-साथ BLO के रूप में भी काम कर रही थीं. इस बीच अचानक कार्डियक अरेस्ट से चल बसीं. बताया जा रहा है कि अचानक शनिवार देर रात उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ. इसके बाद परिवार उन्हें मुरादाबाद के अस्पताल ले गया. लेकिन यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. जिला कार्यक्रम अधिकारी के अनुसार, चिकित्सकीय जांच में पोस्टमार्टम की आवश्यकता नहीं पाई गई और मृत्यु को प्राकृतिक कारण माना गया.
काम और लगातार ऑनलाइन अपलोडिंग का दबाव
परिवार का कहना है कि शोभारानी लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित थीं और बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. लेकिन इसके बाद भी वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड को देर रात तक अपलोड करती रहीं. उनके पति कृपाल सैनी ने बताया कि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ BLO और आंगनबाड़ी के कामाें को संभालती थी. इस वजह से वो लगातार तनाव में चल रही थीं. इसी दौरान बेटे की शादी की तैयारियों से घर का काम और बढ़ गया था. इससे शोभारानी की शारीरिक और मानसिक थकावट और बढ़ गई थी. हालांकि मामले में जिला प्रोग्राम ऑफिसर विमल चौबे ने कहना है कि शोभारानी धामपुर इलाके में BLO थीं. उन्होंने कहा कि उन पर काम का कोई दबाव नहीं था.
BLO सर्वेश सिंह ने दे दी जान, SIR के दबाव का जिक्र
वहीं, दूसरा मामला है मुरादाबाद के भोजपुर क्षेत्र का है. यहां कंपोजिट स्कूल के सहायक अध्यापक और वर्तमान BLO सर्वेश सिंह ने फांसी लगाकर जान दे दी. जानकारी के अनुसार इससे पहले उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी को दो पेज का एक नोट लिखा. इस नाेट में उन्होंने SIR के अत्यधिक दबाव, टारगेट पूरा न कर पाने और मानसिक तनाव का उल्लेख किया.
“रात-दिन काम करता रहा…”
नोट में सर्वेश सिंह ने लिखा कि वो लगातार काम कर रहे थे, फिर भी SIR का टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा था. वे केवल 2–3 घंटे ही सो पाते थे. घर में चार बेटियां, जिनमें से दो बीमार है. परिवार का आरोप है कि एक दिन में 100–200 फॉर्म भरने का दबाव था. समय पर काम न होने पर एफआईआर की धमकी और बीमारी के बावजूद ड्यूटी करने को मजबूर करना उनकी परेशानी का कारण बना.
प्रशासन ने क्या कहा?
परिवार का कहना है कि प्रशासन ने गलत रूप से बयान जारी किया कि सर्वेश को कार्यमुक्त कर दिया गया था, जबकि उनके पास सबूत हैं कि 14 तारीख को भी उनके पति को मोबाइल के माध्यम से काम भेजा गया था. परिवार का आरोप है कि बीमारी के दौरान भी कोई राहत नहीं दी गई.
BLO मौतों का सिलसिला जारी
गौरतलब है कि इससे पहले भी इस तरह के कई मामले सामने चुके हैं. हाल ही में BLO विजय कुमार वर्मा की मौत हुई थी. उनकी पत्नी ने आरोप लगाया था कि काम और तनाव की वजह से उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया था. वहीं, इसके अलावा फतेहपुर में भी BLO सुधीर कोरी ने अपनी जान दे दी थी. इसी तरह बरेली में बीएलओ का काम कर रहे सर्वेश कुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई भी. वहीं, पश्चिम बंगाल में कमल नस्कर को भी हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई भी.
BLO क्या होता है ?
आपको बता दें कि BLO आमतौर पर वोटर आईडी कार्ड बनाने का काम करते हैं। हर BLO को एक बूथ की जिम्मेदारी दी जाती है. इसका मतलब है कि उस बूथ पर जो भी वोट डालने जाएगा, उनके सत्यापन से लेकर वोटर आईडी कार्ड की बनाने की जिम्मेदारी इसी बीएलओ के पास होगी। यानी ये सबसे निचले स्तर का चुनाव अधिकारी होते हैं। आमतौर पर प्राइमरी स्कूल के टीचर्स या फिर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता BLO की जिम्मेदारी निभाते हैं.
क्या होता है BLO का काम?
- घर-घर जाकर वोटर सूची का सत्यापन करना
- जिनके पास वोटर कार्ड नहीं है, उनके नाम जोड़ता है
- मृत या पलायन कर चुके लोगों के नाम हटाना
- फर्जी वोटों की पहचान कर शिकायत दर्ज करता है
- दस्तावेजों की जांच और पुष्टि करता है
- मतदाता सूची को अपडेट रखता है
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