राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद मामले में अब एक नए और बेहद चौंकाने वाले किरदार की एंट्री हो गई है, जिसका नाम सोमेश आनंद है. सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ यह दावा किया जा रहा है कि सोमेश आनंद बोरी भर-भर कर मंदिर के चढ़ावे का पैसा अपने घर पहुंचाता था. इतना ही नहीं, यह भी आरोप हैं कि वह राम मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक गोपाल राव के बेहद करीबी हैं और कोई तो उन्हें गोपाल राव का भतीजा तक बता रहा है. चर्चाएं थीं कि आरोपों के बाद से सोमेश आनंद लगातार भाग रहे हैं और उनका फोन स्विच ऑफ है. लेकिन अब पहली बार सोमेश आनंद खुद सामने आए हैं और इन सभी आरोपों पर बड़े खुलासे किए हैं.
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आखिर कौन हैं सोमेश आनंद?
अपने बारे में खुलासा करते हुए सोमेश आनंद ने बताया कि उनका वास्तविक नाम सोम शंकर आनंद है. वह मूल रूप से कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के निवासी हैं. उन्होंने बताया कि वह पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) में जिला संगठन मंत्री के पद पर लंबे समय तक कार्य कर चुके हैं. इस दौरान गोपाल राव क्षेत्र संगठन मंत्री हुआ करते थे और संगठनात्मक कार्यों के दौरान ही साल 2012 के आसपास उनकी गोपाल राव से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद से वे एक साथ कामकाज देख रहे हैं.
'बोरी भरकर पैसा भेजने' के आरोपों पर क्या बोले सोमेश आनंद?
करोड़ों रुपये और बोरी भरकर घर पैसा भेजने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए सोमेश आनंद ने कहा कि "मेरे दादा और पिता के पास करीब 70 एकड़ जमीन है. पैतृक संपत्ति के अलावा एक-डेढ़ करोड़ की अलग प्रॉपर्टी है. लेकिन मेरे अपने नाम पर एक फीट जगह भी नहीं है. भगवान का दिया हमारे पास पहले से ही सब कुछ है, मुझे घर पैसा भेजने की कोई जरूरत ही नहीं है."
सोमेश ने बताया कि उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से 15,000 की सैलरी मिलती है. उनका रहना और खाना पूरी तरह से ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है, इसलिए उनका कोई अतिरिक्त निजी खर्च नहीं है. मोबाइल बंद होने के दावों पर उन्होंने अपना फोन दिखाते हुए कहा, "मेरा मोबाइल कभी स्विच ऑफ नहीं रहता. प्राण प्रतिष्ठा और कुंभ मेले के अत्यधिक दबाव के समय भी मैंने अपना फोन चालू रखा था और मैं लगातार लोगों के फोन उठा रहा हूं."
साक्ष्य हैं तो मुख्यमंत्री या एसआईटी को दें
सोमेश आनंद ने आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा, "जो लोग भी मुझ पर फालतू के आरोप लगा रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अगर आपके पास कोई भी साक्ष्य (सबूत) हैं, तो आप उसे सीधे मुख्यमंत्री जी या एसआईटी (SIT) को सौंप दें. सोशल मीडिया पर इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाने का कोई मतलब नहीं है."
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग जानबूझकर राम मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक गोपाल राव की छवि को नुकसान पहुंचाने और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से उनका नाम इस विवाद में घसीट रहे हैं, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है.
एसआईटी (SIT) जांच पर उठे सवाल?
राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच वर्तमान में विशेष जांच दल (SIT) कर रही है. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब सोमेश आनंद ने यह दावा किया कि इतनी चर्चाओं और जांच के बावजूद अब तक किसी भी जांच एजेंसी या एसआईटी ने उनसे कोई पूछताछ नहीं की है. फिलहाल, अब इस हाईप्रोफाइल मामले में जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
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