दिल्ली से सटे नोएडा में वेतन और सुविधाओं की मांग को लेकर श्रमिकों का गुस्सा बेकाबू हो गया है. सोमवार को सेक्टर-57 के इंडस्ट्रियल एरिया में प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण करते हुए कई कंपनियों को निशाना बनाया. सैकड़ों की संख्या में आए उपद्रवियों ने न केवल पत्थरबाजी की, बल्कि कंपनी के गेट फांदकर अंदर घुस गए और भारी तोड़फोड़ की.
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गेट फांदकर अंदर घुसी भीड़, शीशे और टीवी तक नहीं छोड़े
घटनास्थल पर मौजूद 'यूपी तक' की टीम ने दिखाया कि सेक्टर-57 स्थित एक कंपनी की बिल्डिंग के लगभग सभी शीशे तोड़ दिए गए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 400 से 500 लोगों की भीड़ अचानक आई और सुरक्षाकर्मियों के रोकने के बावजूद गेट फांदकर अंदर घुस गई. उपद्रवियों ने सिक्योरिटी रूम, रिसेप्शन एरिया, टीवी और यहां तक कि वहां रखे गमलों को भी निशाना बनाया. कंपनी के अंदर का नजारा ऐसा था मानो वहां कोई तूफान आया हो- हर तरफ कांच के टुकड़े और मलबा बिखरा पड़ा था.
"कंपनी खाली करो"- प्रदर्शनकारियों का अल्टीमेटम
वहां तैनात सुरक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों ने बताया कि भीड़ का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्हें रोकना नामुमकिन था. प्रदर्शनकारियों का एकमात्र उद्देश्य कंपनियों को बंद कराना (शटडाउन) था. उन्होंने चिल्लाते हुए कर्मचारियों से कहा, "बाहर निकलो, कंपनी में कोई रहना नहीं चाहिए." राहत की बात यह रही कि भीड़ ने कर्मचारियों पर हमला नहीं किया, बल्कि उनका पूरा गुस्सा कंपनी की संपत्ति पर निकला.
कम वेतन और ओवरटाइम का मुद्दा बना 'चिंगारी'
श्रमिकों की नाराजगी का मुख्य कारण कम वेतन, वेतन मिलने में देरी और ओवरटाइम का उचित भुगतान न होना बताया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार की गाइडलाइंस के बावजूद कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रही हैं. सुरक्षाकर्मियों ने यह भी बताया कि भीड़ में छोटे बच्चे (12-14 साल के) भी शामिल थे, जो जमकर पत्थरबाजी कर रहे थे.
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाकों में फैली इस हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन उपद्रवियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और श्रमिकों की मांगों को लेकर क्या बीच का रास्ता निकाला जाता है.
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