फतेहपुर में स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे के साथ पुलिस ने ये क्या कर दिया?

फतेहपुर में गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई, जिसमें जातिगत नारेबाजी के बाद माहौल गरमा गया. इस घटना के साथ ही सदन में ओम प्रकाश राजभर और सपा विधायक अतुल प्रधान के बीच हुई जुबानी जंग ने राज्य की सियासी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है.

स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य

न्यूज तक डेस्क

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UP: उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत तेज है. ताजा मामला फतेहपुर का है, जहां मौर्य समाज की एक युवती के साथ हुए कथित गैंगरेप के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे उत्कर्ष मौर्य और उनके समर्थकों की पुलिस के साथ जबरदस्त भिड़ंत हो गई.

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क्या है पूरा मामला?

वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, फतेहपुर में एक युवती अपने मंगेतर के साथ पार्क में थी, तभी कुछ युवकों ने उसके साथ छेड़खानी की और बाद में बलात्कार की घटना को अंजाम दिया. पुलिस ने शुरुआत में इसे छेड़खानी का मामला बताया था, लेकिन बाद में सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) की धाराएं जोड़ी गईं. मुख्य आरोपी पर प्रशासन ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. 

पुलिस और समर्थकों के बीच जातिगत बहस

स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मौर्य अपने समर्थकों के साथ जब गांव पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसी दौरान भीड़ में से किसी ने तैनात दरोगा की नेमप्लेट पढ़ ली, जिसके बाद "यादव जी" कहकर नारेबाजी और जातिगत टिप्पणी शुरू हो गई. समर्थकों का आरोप था कि पुलिस उन्हें मिलने नहीं दे रही है, जबकि पुलिस का तर्क था कि बिना उच्चाधिकारियों के आदेश के किसी को अनुमति नहीं दी जा सकती. 

महिला कॉन्स्टेबल की 'दहाड़'

हंगामा तब और बढ़ गया जब समर्थक जबरन आगे बढ़ने लगे. इसी बीच वहां मौजूद एक महिला पुलिसकर्मी ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को जमकर लताड़ लगाई. महिला कॉन्स्टेबल के सख्त रुख के बाद कुछ देर के लिए भीड़ शांत हुई. 

सदन में राजभर बनाम अतुल प्रधान

रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर की भी झलक दिखाई गई है, जहां ओम प्रकाश राजभर और सपा विधायक अतुल प्रधान के बीच तीखी नोकझोंक हुई. राजभर ने जहां अखिलेश यादव पर निशाना साधा, वहीं अतुल प्रधान ने राजभर को उनके पुराने बयानों की याद दिलाते हुए 'धोखेबाज' करार दिया.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब हर अपराध को जातिगत चश्मे से देखे जाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट की ओर इशारा कर रही है.

 

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