पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बीच सियासत का पारा सातवें आसमान पर है. इस चुनावी रण में उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा, जिन्हें यूपी का 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' कहा जाता है, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निशाने पर आ गए हैं. टीएमसी नेताओं ने अजय पाल शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.
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क्या है पूरा विवाद?
आईपीएस अजय पाल शर्मा इस समय पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर चुनाव आयोग की ओर से पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात हैं. विवाद तब शुरू हुआ जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. आरोप है कि अजय पाल शर्मा ने टीएमसी उम्मीदवार के घर जाकर कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में बात की थी. वीडियो वायरल होने के बाद टीएमसी ने इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन और डराने-धमकाने की राजनीति करार दिया.
"घसीट कर बंगाल लाएंगे और कोर्ट में पेश करेंगे"
टीएमसी नेता रिजू दास ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आईपीएस अजय पाल शर्मा पर जमकर हमला बोला. उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "समय रहते सुधर जाइए, किसी को बख्शा नहीं जाएगा. आप चाहे जितने बड़े ऑफिसर हों, 4 तारीख (नतीजों) के बाद कोई बीजेपी नेता आपको नहीं बचा पाएगा. हम आपके खिलाफ एफआईआर करेंगे, चार्जशीट दाखिल करेंगे और आपको घसीट कर बंगाल लाएंगे." टीएमसी उम्मीदवार ने भी बंगाली में पलटवार करते हुए कहा कि "खेला आपने शुरू किया है, खत्म हम करेंगे."
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
विवाद इतना बढ़ गया है कि वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. इस याचिका में अजय पाल शर्मा को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अजय पाल शर्मा की मौजूदगी चुनावी माहौल को खराब कर रही है और वे राजनीतिक उम्मीदवारों को डराने-धमकाने की गतिविधियों में शामिल हैं.
ग्राउंड जीरो पर क्या हैं हालात?
इन तमाम राजनीतिक बयानबाजियों और नारेबाजी के बीच, दूसरे चरण का मतदान जारी है. फिलहाल फलता विधानसभा क्षेत्र में माहौल शांत बताया जा रहा है. अजय पाल शर्मा खुद मतदान केंद्रों का राउंड ले रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं. उन्हें स्थानीय अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हुए भी देखा गया है.
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