माफिया अतीक अहमद के सबसे बड़े बेटे उमर अहमद को जब लखनऊ जेल से पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में उसके काफिले की गाड़ियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. यह पूरा मामला 8 अगस्त का है, जब उमर को अपने सबसे छोटे भाई अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए पुलिस अभिरक्षा में लखनऊ से प्रयागराज लाया जा रहा था. प्रयागराज पहुंचने से पहले नवाबगंज थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 19 पर स्थित एक टोल प्लाजा पर उमर के समर्थकों द्वारा जमकर बवाल करने का आरोप सामने आया है.
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टोल प्लाजा पर बैरियर तोड़ा और गाड़ियों से कुचलने का प्रयास
घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि टोल प्लाजा के बूथ नंबर तीन पर कर्मचारी अपनी ड्यूटी कर रहे थे. इसी दौरान उमर अहमद को लेकर जा रहा पुलिस का काफिला वहां से गुजरा. पुलिस के सरकारी वाहनों के निकलते ही उनके पीछे चल रही लगभग 25 से 30 निजी गाड़ियां बिना टोल टैक्स दिए तेजी से आगे बढ़ने लगीं. टोल प्रबंधन के अनुसार, इन गाड़ियों में एक सफेद रंग की महिंद्रा एक्सयूवी और काले रंग की क्रेटा समेत कई अन्य वाहन शामिल थे. जब टोल कर्मियों ने इन वाहनों को रोकने का प्रयास किया, तो तेज रफ्तार गाड़ियों से बैरियर तोड़ दिया गया और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की गई. इतना ही नहीं, आरोप है कि कर्मचारियों पर गाड़ियां चढ़ाकर उन्हें कुचलने की कोशिश भी की गई, जिसके बाद कर्मचारियों ने पीछे हटकर किसी तरह अपनी जान बचाई.
पुलिस ने दर्ज की FIR, सीसीटीवी से जांच शुरू
टोल प्लाजा पर हुई इस घटना के बाद टोल मैनेजर जयप्रकाश यादव की ओर से नवाबगंज थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायत में घटना में शामिल कई वाहनों के नंबर भी दिए गए हैं. टोल प्रबंधन का कहना है कि गाड़ियों ने न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि टोल टैक्स न देकर राजस्व को भी बड़ी चपत लगाई है. नवाबगंज पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि दर्ज कराए गए वाहन नंबरों के आधार पर गाड़ी मालिकों और घटना में शामिल आरोपियों की पहचान की जा रही है, साथ ही उस समय काफिले में कौन-कौन लोग मौजूद थे इसकी भी पड़ताल की जा रही है.
सड़क हादसे में हुई थी छोटे भाई अबान की मौत
आपको बता दें कि 6 अगस्त को झांसी-कानपुर हाईवे पर पुंछ थाना क्षेत्र में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई थी. बीते 5 सालों से जेल में बंद उमर अहमद को अपने छोटे भाई के सुपुर्द-ए-खाक (जनाजे) में शामिल होने के लिए पैरोल पर प्रयागराज लाया गया था. वहीं झांसी जेल में बंद उसका दूसरा भाई अली भी जनाजे में पहुंचा था.
भाई के जनाजे में फफक कर रोए थे उमर और अली
सुपुर्द-ए-खाक के दौरान दोनों भाई एक-दूसरे से लिपटकर फफक-फफक कर रोते नजर आए थे. इस दौरान उमर अपने भाइयों अली और अजहम को संभालते और चुप कराते हुए दिखे थे. वहां मौजूद भीड़ जब नारेबाजी करने लगी तो उमर ने ही समर्थकों को शांत कराया और अनुशासन बनाए रखने की अपील की. उमर ने अपने भाइयों से भी शांति बनाए रखने को कहा था ताकि पुलिस को किसी तरह की कार्रवाई करने का मौका न मिले.
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