69,000 शिक्षक भर्ती: किसी की नहीं जाएगी नौकरी! जानिए योगी सरकार के हलफनामे में क्या है खास?

सुषमा पांडेय

• 09:24 AM • 28 Jul 2026

सुप्रीम कोर्ट में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई से ठीक पहले योगी सरकार ने हलफनामा दाखिल कर साफ किया है कि वर्तमान में कार्यरत किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़े सियासी घटनाक्रम सामने आए हैं. एक तरफ जहां बहुचर्चित 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर राहत का रास्ता निकाला है, वहीं दूसरी तरफ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा 2027 चुनाव के लिए बार-बार दिए जा रहे 'गठबंधन के ऑफर' पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है.

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1. 69,000 शिक्षक भर्ती: योगी सरकार के हलफनामे में क्या है खास?

सुप्रीम कोर्ट में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले पर फैसला आने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम हलफनामा (Affidavit) दाखिल किया है.

  • किसी की नौकरी नहीं जाएगी: सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कार्यरत 67,867 शिक्षकों में से किसी की भी नौकरी नहीं छीनी जाएगी.
  • ओबीसी और अनारक्षित वर्ग का समायोजन: सरकार ने कोर्ट को 8,270 अभ्यर्थियों की संशोधित सूची भी सौंपी है, जिसमें 3,324 अभ्यर्थी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं.
  • खाली सीटों पर भर्ती: पिछली सूची में से लगभग 4,926 पद ऐसे थे जिन पर अभ्यर्थियों ने जॉइनिंग नहीं की थी. सरकार इन बची हुई सीटों और संशोधित सूची के माध्यम से छूटे हुए अभ्यर्थियों को समायोजित करने की योजना बना रही है.

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग सकता है.

2. ओवैसी का 'कुर्सी और पैर पर पैर' वाला ऑफर

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को देखते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार सूबे में रैलियां कर रहे हैं और अखिलेश यादव को सपा-AIMIM गठबंधन का न्योता दे रहे हैं. ओवैसी ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि:

"अब हम दरी बिछाकर नीचे नहीं बैठेंगे. अगर अखिलेश कुर्सी पर बैठेंगे, तो ओवैसी भी उनके सामने पैर पर पैर डालकर बैठकर हक और इंसाफ की बात करेगा. आज वक्त है बात कर लो, बाद में रोना मत."

अखिलेश यादव का जवाब

ओवैसी के इस तीखे बयान और गठबंधन के न्योते पर जब अखिलेश यादव से संसद के बाहर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया:

"किसी से उलझो मत, किसी से उलझने की जरूरत नहीं है. हम पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और सामाजिक न्याय के रास्ते पर चलेंगे. हमने जिस गठबंधन के साथ भाजपा को हराया है, उसी के साथ आगे बढ़ेंगे." 

अखिलेश के इस बयान से साफ हो गया है कि वे ओवैसी के सियासी जाल में फंसने के मूड में नहीं हैं और समाजवादी पार्टी का रुख AIMIM से दूरी बनाए रखने का ही रहेगा.

3. जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर ओवैसी ने सपा को घेरा

मुरादाबाद और रामपुर दौरे के दौरान ओवैसी ने केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर अखिलेश यादव को भी कटघरे में खड़ा किया. ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब 2017 तक अखिलेश यादव खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने 1973 के कानून के तहत जौहर यूनिवर्सिटी का नियमितीकरण (Regularization) क्यों नहीं कराया.

4. संसद में गरजीं डिंपल यादव

उधर, संसद भवन परिसर में मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और नीट (NEET) परीक्षा मुद्दे को लेकर आक्रामक दिखीं. डिंपल यादव ने मांग की कि गृह मंत्री खुद सदन में आकर जवाब दें कि युवाओं पर इस तरह की बर्बरता क्यों की गई.

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