Explainer: कांग्रेस ने यूपी में क्यों चुनी मोना-मसूद की जोड़ी? वोट बैंक से लेकर सपा सीट शेयरिंग तक समझिए पूरा प्लान

ललित यादव

03 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 3 2026 9:24 AM)

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में संगठन का बड़ा चेहरा बदल दिया है. आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष होंगे. देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और निषाद समीकरण को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है.

aradhana mishra, imran masood
aradhana mishra, imran masood
Google CTA

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. पार्टी ने रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है. वहीं सहारनपुर के लोकसभा सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है.

Read more!

आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ अजय राय का यूपी कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है. अब प्रदेश संगठन की कमान नई टीम के हाथों में होगी. कांग्रेस के इस बदलाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.

कांग्रेस ने एक साथ साधे कई सामाजिक समीकरण

यूपी कांग्रेस की नई टीम को देखें तो इसमें अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश दिखाई देती है. आराधना मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आती हैं. उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने अपने पुराने ब्राह्मण आधार को दोबारा जोड़ने की कोशिश की है.

वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. वह मुस्लिम समुदाय से आते हैं. पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी देकर मुस्लिम वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है. कांग्रेस ने दलित और निषाद समुदाय को भी संगठन में जगह दी है. पासी समाज से आने वाले आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है. वहीं निषाद समुदाय से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र निषाद को भी वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है.

दलित और अंबेडकरवादी वोट बैंक के लिए कांग्रेस पहले ही राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रभारी बना चुकी है. ऐसे में नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और निषाद समीकरण को एक साथ साधने की कोशिश साफ नजर आती है.

आराधना मिश्रा के जरिए कांग्रेस का डबल दांव

आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने सिर्फ ब्राह्मण कार्ड ही नहीं खेला है, बल्कि महिला वोटरों को भी साधने की कोशिश की है. आराधना मिश्रा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. वह रामपुर खास से तीन बार विधायक रह चुकी हैं. अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है. कांग्रेस के लिए आराधना मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी अपने पुराने सवर्ण और खासकर ब्राह्मण आधार को दोबारा अपने साथ जोड़ना चाहती है. यह नियुक्ति उसी के तौर पर मानी जा रही है.

कौन हैं आराधना मिश्रा 'मोना'?

आराधना मिश्रा को 'मोना' के नाम से भी जाना जाता है. वह दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति में हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति की समझ रखने वाली कांग्रेस नेताओं में उनका नाम लिया जाता है. आराधना मिश्रा कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रह चुकी हैं. अब यह जिम्मेदारी वीरेंद्र चौधरी को सौंपी गई है. आराधना प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी गई हैं.

उनके पिता प्रमोद तिवारी का भी रामपुर खास से लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा है. प्रमोद तिवारी इस सीट से नौ बार विधायक रहे. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया और राज्यसभा सदस्य बने. इस तरह आराधना मिश्रा को राजनीति की मजबूत पारिवारिक विरासत मिली है. अब कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

प्रियंका गांधी के साथ भी काम कर चुकी हैं आराधना

आराधना मिश्रा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की करीबी नेताओं में माना जाता है. उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चलाए गए 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान में भी आराधना मिश्रा ने उनके साथ सक्रिय भूमिका निभाई थी. यूपी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय होने के कारण आराधना मिश्रा को राज्य के राजनीतिक समीकरणों की अच्छी समझ रखने वाली नेता के तौर पर देखा जाता है.

इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर क्या संदेश?

कांग्रेस ने आराधना मिश्रा के साथ इमरान मसूद को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी है. सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका राजनीतिक प्रभाव माना जाता है. उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की है. पार्टी की कोशिश पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल और अवध तक मुस्लिम वोटरों को अपने साथ जोड़ने की मानी जा रही है.

ब्राह्मण वोट पर कांग्रेस की नजर क्यों?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 8 से 10 फीसदी बताई जाती है. करीब 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव माना जाता है. बलरामपुर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, चंदौली, वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज जैसे जिलों में ब्राह्मण समुदाय की संख्या और प्रभाव अधिक बताया जाता है.

90 के दशक से पहले ब्राह्मण समुदाय का झुकाव मुख्य रूप से कांग्रेस की तरफ माना जाता था. बाद के वर्षों में इस समुदाय का बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ चला गया. अब कांग्रेस एक बार फिर इस सामाजिक आधार को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

सीट शेयरिंग की टेबल पर भी दिखेगा असर?

कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल को समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग की बातचीत के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. अब सीट बंटवारे को लेकर बातचीत की टेबल पर आराधना मिश्रा 'मोना' और इमरान मसूद की अहम भूमिका होगी. एक ओर इमरान मसूद लगातार सपा को लेकर मुखर रहे हैं और ज्यादा सीटों की मांग को लेकर कांग्रेस का पक्ष मजबूती से रखने की बात कही जा रही है. वहीं दूसरी ओर आराधना मिश्रा 'मोना' का रुख सीट शेयरिंग की बातचीत में अलग संतुलन बना सकता है.

आराधना मिश्रा के पिता प्रमोद तिवारी के समाजवादी पार्टी के साथ अच्छे संबंध रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस की नई टीम में एक तरफ इमरान मसूद का तेवर वाला रुख होगा, तो दूसरी तरफ आराधना मिश्रा के जरिए बातचीत में नरम पक्ष भी मौजूद रहेगा. यानी सीट शेयरिंग की टेबल पर कांग्रेस के पास अब 'गरम और नरम', दोनों तरह के रुख रखने वाले चेहरे होंगे. यही वजह है कि कांग्रेस के इस संगठनात्मक बदलाव को सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.