उत्तर प्रदेश में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव में अब महज कुछ ही महीनों का वक्त बचा है, और इसके साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है. इस चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच गठबंधन के तहत सीटों के तालमेल और बंटवारे को लेकर अंदरखाने बातचीत तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी की नजर इस बार राज्य की करीब 125 से 150 विधानसभा सीटों पर टिकी हुई है, जिसके आधार पर पार्टी अपनी रणनीति तैयार कर रही है. साथ ही चर्चाएं इस बात चर्चा है कि अब कांग्रेस की ओर से कमान प्रियंका गांधी संभालेंगी. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी बात.
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प्रियंका गांधी संभालेंगी सपा के साथ बातचीत की कमान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ सीट शेयरिंग के फार्मूले और बातचीत की पूरी कमान अब कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हाथों में सौंपने चर्चा है. बताया जा रहा है कि इसी सिलसिले में प्रियंका गांधी ने हाल ही में 19 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब 3 घंटे तक लंबी बैठक की. इस अहम बैठक में राज्य की लगभग 175 सीटों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई.
सीटों की 'A, B और C' कैटेगरी में ग्रेडिंग
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देने के लिए सीटों की खास ग्रेडिंग तैयार की है:
- लगभग 100 सीटों को 'Category A' में रखा गया है, जो पार्टी के लिहाज से सबसे मजबूत मानी जा रही हैं.
- इसके अलावा 40 और 50 सीटों को 'Category B' के तहत चिन्हित किया गया है.
- साथ ही, अन्य श्रेणियों के तहत 25 और 35 सीटों की भी एक फेहरिस्त तैयार की गई है, जिससे यह तय किया जा सके कि कौन सी सीटें पार्टी के लिए सबसे बेहतर साबित हो सकती हैं.
सूत्रों का कहना है कि इसी हफ्ते यूपी कांग्रेस के नेताओं की एक और अहम बैठक होगी, जिसमें प्रियंका गांधी भी शामिल होंगी. इसके बाद कांग्रेस समाजवादी पार्टी के सामने लगभग 125 से 150 सीटों की एक फाइनल लिस्ट रख सकती है. कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि नवंबर तक किसी भी कीमत पर सपा के साथ सीट शेयरिंग का फार्मूला तय कर लिया जाए.
पुराने चुनावों के आंकड़ों पर टिकी है कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस पार्टी ने अपनी यह विशलिस्ट साल 2024 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनावों के वोट शेयर व आंकड़ों के आधार पर तैयार की है. कांग्रेस का लक्ष्य है कि यूपी की हर एक लोकसभा सीट के अंतर्गत कम से कम एक विधानसभा सीट उसके पास जरूर हो, ताकि सभी लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी की मजबूत पकड़ बनी रहे.
याद दिला दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें सपा ने कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं और कांग्रेस को उनमें से 6 सीटों पर जीत मिली थी. उस चुनाव में कांग्रेस 38 विधानसभा सीटों पर आगे थी और 42 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी. इस बार कांग्रेस अपनी इन्हीं विशलिस्ट वाली सीटों के अलावा रायबरेली, अमेठी, सहारनपुर और अजय राय, अजय लल्लू, सुप्रिया श्रीनेत तथा नदीम जावेद जैसे दिग्गज नेताओं से जुड़ी सीटों पर भी खास फोकस रख रही है.
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का क्या है रुख?
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के तेवर और रणनीतिक गणना कांग्रेस से कुछ अलग नजर आ रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अखिलेश यादव की पार्टी कांग्रेस के लिए 60 से 65 सीटों से ज्यादा छोड़ने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है. अखिलेश यादव लगातार यह कहते रहे हैं कि सीट बंटवारे का मुख्य आधार 'जीतने की काबिलियत' (Winning Capability) होना चाहिए, जिससे कांग्रेस के लिए मोलभाव करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
इसके साथ ही, अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की बैठकों में यह साफ कर दिया है कि सपा नेताओं को राज्य की कुल 403 सीटों में से लगभग 350 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए, और पार्टी ने कई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर अंदरखाने विचार करना भी शुरू कर दिया है.
प्रियंका गांधी का पुराना राजनीतिक अनुभव और यूपी का सियासी समीकरण
गौरतलब है कि प्रियंका गांधी ने साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के पूरे चुनावी अभियान की कमान संभाली थी. उस दौरान उनका चर्चित नारा 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' काफी सुर्खियों में रहा था. हालांकि, उस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था और पार्टी को केवल दो सीटों (आराधना मिश्रा और वीरेंद्र चौधरी) पर ही संतोष करना पड़ा था. अब एक बार फिर प्रियंका गांधी के सक्रिय होने और सपा के साथ सीट शेयरिंग की बातचीत की बागडोर संभालने से उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है. देखना यह होगा कि क्या इस बार सपा और कांग्रेस का यह गठबंधन सीटों के पेंच को सुलझाकर चुनावी मैदान में मजबूती से उतर पाता है या नहीं.
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