उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ गया है. शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों के बीच समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेताओं की कथित नॉनवेज पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो के सामने आने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अखिलेश यादव की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाकर जोरदार पलटवार किया है.
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद पीलीभीत जिले से सामने आया है. दावा किया जा रहा है कि 13 अक्टूबर को पीडीए (PDA) सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन, सपा नेता मोहम्मद आरिफ के घर एक दावत में शामिल हुए थे. वायरल वीडियो में कुछ लोग चिकन खाते नजर आ रहे हैं, और दावा किया जा रहा है कि इस दावत में सांसद रामजीलाल सुमन भी मौजूद थे. वीडियो सामने आते ही बीजेपी को बैठे-बठाए एक बड़ा सियासी मुद्दा मिल गया.
बीजेपी का समाजवादी पार्टी पर हमला
बीजेपी ने इसे समाजवादी पार्टी की कथनी और करनी का अंतर बताया है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि एक तरफ अखिलेश यादव मंदिरों और राम मंदिर जाने की बात कहकर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का चोला ओढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता नवरात्रि के दिनों में नॉनवेज पार्टी कर रहे हैं. बीजेपी ने यह भी सवाल उठाया है कि जब त्योहार और नवरात्रि के दौरान नॉनवेज की दुकानें बंद रहती हैं, तो यह मांस कहां से आया? पार्टी ने इस मामले की प्रशासनिक जांच कराने और जिला प्रशासन को पत्र लिखने की बात कही है.
समाजवादी पार्टी का पलटवार
बीजेपी के तीखे हमलों के बाद समाजवादी पार्टी भी पूरी आक्रामक मुद्रा में आ गई है. सपा के पीलीभीत जिला अध्यक्ष धर्मेश गंगवार और पूर्व राज्य मंत्री ने बीजेपी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. सपा नेताओं ने तंज कसते हुए बीजेपी और एनडीए के कई दिग्गज नेताओं के पुराने बयानों और बंगाली तथा अन्य मंदिरों में मछली खाने से जुड़े विवादों का जिक्र किया और कहा कि बीजेपी सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे मुद्दों को तूल दे रही है.
सियासत पर असर
बहरहाल, पीलीभीत का यह वायरल वीडियो अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल लेकर आ गया है. आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए धार्मिक आस्था, खानपान और पीडीए बनाम हिंदुत्व की यह बहस सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन चुकी है.
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