उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला और सरकारी दावों की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है. यहां जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर बसे एक गांव में युवा शादी के लिए तरस रहे हैं. गांव में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं. पानी के इसी विकराल संकट के चलते इस गांव के लड़के कुंवारे रहने को मजबूर हैं, क्योंकि कोई भी पिता इस गांव में अपनी बेटी की शादी करने को तैयार नहीं है.
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करोड़ों की टंकी, लेकिन पानी की एक बूंद नहीं
यह पूरा मामला महोबा जिले के मुहरा गांव का है.'हर घर जल' और 'नमामि गंगे' जैसी बड़ी-बड़ी योजनाओं के तहत इस गांव में करोड़ों रुपये की लागत से पानी की टंकी खड़ी की गई और पाइपलाइन भी बिछाई गई. ग्रामीणों का आरोप है कि करीब ढाई से तीन साल पहले यह टंकी बनकर तैयार हुई थी, लेकिन ट्रायल के नाम पर सिर्फ एक दिन इसे चलाया गया और तब से इस पर ताला लटका हुआ है. भीषण गर्मी के इस मौसम में भी इस टंकी से ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है.
गांव में 30-40 लड़के बैठे हैं कुंवारे
गांव वालों का कहना है कि पानी की किल्लत के कारण उनके घरों में शहनाइयां नहीं बज पा रही हैं. गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि हर घर में दो-दो, तीन-तीन लड़के शादी की उम्र पार कर चुके हैं. गांव में करीब 30 से 40 लड़के ऐसे हैं जिनकी उम्र 26 से लेकर 40-50 साल तक हो चुकी है, लेकिन वे कुंवारे हैं.
जब भी कोई रिश्तेदार या लड़की वाले आते हैं, तो गांव की बदहाली और पानी का संकट देखकर लौट जाते हैं. लोगों का कहना है कि लड़की वाले साफ मना कर देते हैं कि "तुम्हारे घर में पानी नहीं है, हमारी बेटी दिनभर बाहर से सिर पर पानी ढोने थोड़ी न आएगी."
2 किलोमीटर दूर से साइकिल और सिर पर लाते हैं पानी
मुहरा गांव में पानी के नाम पर केवल तीन हैंडपंप हैं, जिनमें से दो का पानी पूरी तरह खारा है. पूरे गांव की प्यास बुझाने के लिए केवल एक हैंडपंप का सहारा है. भीषण गर्मी में पानी भरने के लिए लोगों को 2 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है. लोग साइकिलों, डब्बों और सिर पर रखकर पानी लाने को मजबूर हैं. गांव वालों ने बताया कि अगर गांव में कोई शादी-ब्याह का कार्यक्रम होता भी है, तो उन्हें पानी मोल (खरीदकर) मंगाना पड़ता है. कई बार तो बाराती प्यासे ही लौट जाते हैं.
चुनाव में आते हैं नेता, जीतने के बाद गायब
ग्रामीणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं को लेकर भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता हाथ जोड़कर वोट मांगने आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं. लेकिन एक बार चुनाव जीतने के बाद कोई भी नेता दोबारा इस गांव की सुध लेने नहीं आता. ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन जमीन पर कोई सुधार नहीं हुआ.
अधिकारी का क्या है कहना?
इस गंभीर समस्या को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई, तो हमेशा की तरह रटा-रटाया जवाब मिला. अधिकारी ने कहा कि मामला अब उनके संज्ञान में आया है. भीषण गर्मी को देखते हुए त्वरित टीमें भेजी जा रही हैं और जल निगम के अधिकारियों से बात करके मुहरा गांव की जल समस्या का जल्द से जल्द समाधान कराया जाएगा. हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि जब सालों से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं तो अब तक प्रशासन सोया क्यों था?
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