उत्तर प्रदेश के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के हालिया एमएलसी चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है. समाजवादी पार्टी (SP) ने इन चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी सीटों की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 कर ली है, जिसे साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है. इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव की रणनीतिक भूमिका और संगठनात्मक पकड़ सबसे अहम मानी जा रही है.
ADVERTISEMENT
लखनऊ और वाराणसी में सपा की बड़ी बढ़त
एमएलसी चुनावों में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को बड़ा झटका देते हुए लखनऊ स्नातक सीट पर कब्जा जमाया. यहां सपा उम्मीदवार कांती सिंह ने बीजेपी के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को 14,000 से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दी. इसके साथ ही वाराणसी की दोनों सीटों पर भी सपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा. दो रात और तीन दिन के लंबे इंतजार के बाद जब वाराणसी से आशुतोष सिन्हा की जीत पक्की हुई, तो शिवपाल यादव ने खुद फोन करके उन्हें बधाई दी और हौसला बढ़ाया, जो पार्टी उम्मीदवारों के साथ उनके सीधे जुड़ाव को दिखाता है.
2027 के रण के लिए क्यों खास हैं शिवपाल यादव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति के पीछे चाचा शिवपाल का पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पुराना और सीधा संपर्क एक बड़ा फैक्टर रहा है. मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अब तक शिवपाल यादव की पहचान एक ऐसे जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही है जो यूपी के जिलों, कस्बों और गांवों के पुराने कार्यकर्ताओं को अच्छी तरह समझते हैं. साल 2022 के दिसंबर में अपनी पार्टी का सपा में विलय करने के बाद से वे लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को धार देने और बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती पेश करने में उनकी यह भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है.
ये भी पढ़ें: बरेली: करवा चौथ पर पति ने होटल में पत्नी को दूसरे युवक के साथ पकड़ा, फिर जो हुआ उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी!
ADVERTISEMENT


