UP: यादव परिवार की 'बागी' बहू, मुलायम की विरासत छोड़ बीजेपी में कैसे रची अपर्णा ने अपनी नई राह?

बीजेपी नेता अपर्णा यादव ने महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर अखिलेश यादव की तस्वीर वाला सपा का झंडा जलाकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. प्रतीक यादव के साथ अपनी प्रेम कहानी से लेकर बीजेपी तक के सफर में अपर्णा ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं.

अपर्णा यादव- प्रतीक यादव
अपर्णा यादव- प्रतीक यादव

रजत सिंह

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'यादव परिवार' हमेशा चर्चा का केंद्र रहता है, लेकिन इस बार सुर्खियों में परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव हैं. हाल ही में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर हुए हंगामे के बीच अपर्णा यादव ने जिस तरह से अखिलेश यादव की तस्वीर वाले समाजवादी पार्टी के झंडे को जलाया, उसने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है. मुलायम सिंह यादव की बहू और अब बीजेपी नेता अपर्णा यादव आखिर यादव परिवार की राजनीति से इतनी दूर कैसे हो गईं? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी.

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ईमेल से शुरू हुआ था प्रतीक और अपर्णा का सफर

अपर्णा यादव (पूर्व नाम अपर्णा बिष्ट) और मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की प्रेम कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. साल 2001 में लखनऊ के एक स्कूल में पढ़ते समय एक जन्मदिन की पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई थी. उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, तो दोनों ने ईमेल के जरिए बातचीत शुरू की. करीब 10 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद दोनों शादी के बंधन में बंधे. प्रतीक यादव पेशे से व्यवसायी हैं और रियल एस्टेट का काम संभालते हैं.

राजनीति में एंट्री और मोहभंग

अपर्णा यादव शुरू से ही राजनीतिक रूप से महत्वाकांक्षी रही हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लखनऊ की कैंट सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. कहा जाता है कि हार के बाद से ही परिवार और पार्टी के साथ उनकी अनबन शुरू हो गई थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों की तारीफ करना शुरू कर दिया था. आखिरकार, 2022 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया, जिसे यादव परिवार के लिए एक बड़ा झटका माना गया.

पोस्टर विवाद और झंडा दहन

हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर संविधान संशोधन प्रस्ताव गिरने के बाद बीजेपी ने विपक्षी पार्टियों पर 'नारी विरोधी' होने का आरोप लगाया. इसी के विरोध में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने प्रदर्शन किया. उन्होंने सपा का झंडा जलाया, जिसमें अखिलेश यादव की तस्वीर लगी थी. इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि यादव परिवार की बहू अब अपने ही परिवार की पुरानी राजनीतिक विरासत के खिलाफ खड़ी हैं.

निजी जीवन में भी रहा है उतार-चढ़ाव

सिर्फ राजनीति ही नहीं, अपर्णा का निजी जीवन भी बीते दिनों चर्चा में रहा. प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसे पोस्ट किए थे जिसमें अपर्णा को 'स्वार्थी' और 'परिवार तोड़ने वाला' बताया गया था. एक समय तो ऐसा लगा कि दोनों के बीच तलाक की नौबत आ गई है, हालांकि बाद में प्रतीक ने स्पष्ट किया कि अब उनके बीच सब कुछ ठीक है.

 

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