उत्तर प्रदेश में बढ़ेगी विधायकों और सांसदों की संख्या, जानें कब से UP में होंगे 606 विधायक और 120 सांसद

उत्तर प्रदेश में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 606 और लोकसभा सीटों की संख्या 120 होने की संभावना है. साथ ही महिला आरक्षण बिल लागू होने से यूपी की कई हॉट सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा.

उत्तर प्रदेश
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रजत सिंह

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. देश की सबसे बड़ी विधानसभा और सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में जनप्रतिनिधियों की संख्या और बढ़ने वाली है. चर्चा है कि परिसीमन के बाद यूपी में विधायकों की संख्या 403 से बढ़कर 606 और सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी.

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क्या 2027 के चुनाव में ही बढ़ जाएगी संख्या?

सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में ही यूपी को 600 से ज्यादा विधायक मिलेंगे? हालांकि, जानकारों और संवैधानिक नियमों के मुताबिक ऐसा होना फिलहाल मुश्किल है. 84वें संविधान संशोधन के तहत सीटों के परिसीमन पर 2026 तक रोक लगी हुई है. 2026 के बाद नई जनगणना (जो आने वाले समय में प्रस्तावित है) के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी. इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है, इसलिए 2027 के चुनाव में सीटों की संख्या बढ़ना मुमकिन नहीं दिखता, लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव में यूपी से 120 सांसद संसद पहुंच सकते हैं.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम और 33% आरक्षण

संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और परिसीमन बिल पर चर्चा होने की उम्मीद है. इस अधिनियम के लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित हो जाएंगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में मजाक में कहा था कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद अगली बार गोरखपुर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों पर भी किसी महिला उम्मीदवार को मौका मिल सकता है.

सीतापुर सांसद राजेश राठौर का बयान वायरल

इसी बीच सीतापुर से कांग्रेस सांसद राजेश राठौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कुछ जाति विशेष (मिश्रा, त्रिपाठी, दीक्षित) को संबोधित करते हुए उन्हें 'अंधभक्त' कह दिया. उन्होंने कहा कि "देश की जनता आप जैसे अंधभक्तों के कारण ही पीस रही है." सांसद के इस बयान पर ब्राह्मण समुदाय और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तीखी बहस छिड़ गई है.

अतीक अहमद और माफिया राज का अंत

वीडियो रिपोर्ट में यूपी के माफिया राज, विशेषकर अतीक अहमद के अंत पर भी चर्चा की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, अतीक अहमद की गुंडागर्दी और रेलवे स्क्रैप के धंधे में उसके दखल की वजह से रेलवे को अपना पूरा काम इलाहाबाद से झांसी शिफ्ट करना पड़ा था. जमीनों के कब्जे और लस्ट ऑफ लैंड (जमीन की हवस) ने कैसे अतीक को एक बड़े अपराध के दलदल में धकेला, इसकी पूरी कहानी भी साझा की गई है.

 

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