UP Politics: बीजेपी मंत्री रविंद्र जायसवाल के बिगड़े बोल, अखिलेश यादव को लेकर दिया विवादित बयान, भड़की सपा

रजत सिंह

• 10:57 AM • 10 Jul 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी मंत्री रविंद्र जायसवाल के विवादित बयान पर नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है. चंदौली में अखिलेश यादव पर की गई अभद्र टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है और मंत्री को बर्खास्त करने की मांग उठाई है. विस्तार से जानिए पूरी खबर.

Uttar Pradesh Politics
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उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों 'राम मंदिर चढ़ावा चोरी' के मुद्दे को लेकर घमासान मचा हुआ है. विपक्ष लगातार इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मंत्रियों और नेताओं को घेर रहा है. इस बीच, चंदौली पहुंचे उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए एक विवादित बयान दे दिया है. पूर्वांचल के लहजे में बोलते-बोलते मंत्री जी के बोल इतने बिगड़ गए कि उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल कर डाला. इस बयान के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी पूरी तरह से हमलावर हो गई है और इसे सीधे तौर पर पिछड़ों और बहुजन समाज का अपमान बता रही है.

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कब्रिस्तान और श्मशान के मुद्दे पर बिगड़े मंत्री के बोल

चंदौली में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री रविंद्र जायसवाल ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब वे विधायक थे और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब सपा सरकार मुसलमानों के कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल सुरक्षित करने का प्रस्ताव लेकर आई थी. मंत्री के मुताबिक, उन्होंने तब मांग की थी कि मुसलमानों के कब्रिस्तान के साथ हिंदुओं के श्मशान घाट के लिए भी फंड दिया जाए, लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने श्मशान के लिए कोई फंड नहीं दिया.

मंत्री ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को सिर्फ कब्रिस्तान वाले ही प्रिय हैं. इसी मुद्दे पर बोलते हुए रविंद्र जायसवाल ने आगे कहा कि 100 करोड़ हिंदू सोच के लोगों के घावों को कुरेदने का प्रयास किया जा रहा है और लुंगी-जालीदार टोपी पहनने वालों के वोट बैंक के लिए काम किया जा रहा है. इसी दौरान वे अखिलेश यादव के खिलाफ अपशब्द और बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग कर गए.

समाजवादी पार्टी का तीखा पलटवार और बर्खास्तगी की मांग

मंत्री रविंद्र जायसवाल के इस बयान पर समाजवादी पार्टी ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज काका ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंदौली की धरती पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के बड़े नेता अखिलेश यादव के खिलाफ जिस तरह से गाली और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, वह भारतीय जनता पार्टी की गिरती हुई राजनैतिक सोच का परिणाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब 'गालीबाजों का गिरोह' बन चुकी है. मनोज काका ने देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि अगर उनमें जरा सी भी राजनीतिक नैतिकता और लोकतंत्र में विश्वास बाकी है, तो ऐसे मंत्री को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए.

सपा ने बयान को बताया 'पीडीए और पिछड़ों को गाली'

समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले को आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. प्रवक्ता मनोज काका ने कहा कि अगर मंत्री रविंद्र जायसवाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो उत्तर प्रदेश का जनमानस यह समझ जाएगा कि दलितों, पिछड़ों और बहुजन यानी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के नेताओं को गाली देना ही भाजपा का नया चरित्र बन गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यूपी की जनता साल 2027 के चुनाव में इन गालीबाजों को ठीक से सबक सिखाने का काम करेगी.

कौन हैं मंत्री रविंद्र जायसवाल और क्या है इसके सियासी मायने?

अखिलेश यादव पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री रविंद्र जायसवाल भारतीय जनता पार्टी के बेहद जमीनी और कद्दावर नेता माने जाते हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। वह वाराणसी की शहर उत्तरी विधानसभा सीट से लगातार तीन बार के विधायक हैं. वैश्य समाज से आने वाले रविंद्र जायसवाल की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं.

2027 से पहले पूर्वांचल में पिछड़ा बनाम अगड़ा की राजनीति

इस पूरे विवाद के पीछे पूर्वांचल की गहरी सियासी गणित छिपी हुई है. पूर्वांचल के इलाके में पिछड़ों की राजनीति बेहद मजबूत और निर्णायक मानी जाती है. बीते दिनों गाजीपुर में हुए बिंद एनकाउंटर मामले के बाद अब चंदौली में बीजेपी मंत्री के इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को भुनाकर पिछड़ा बनाम अगड़ा की राजनीति को हवा दे रही है, जिससे भाजपा को बड़ा सियासी नुकसान हो सकता है.

वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी इस पूरे विमर्श को एक बार फिर राम मंदिर और कब्रिस्तान बनाम श्मशान के मुद्दे पर लाकर हिंदू-मुस्लिम की पिच पर खेलने का प्रयास कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अक्सर अपनी सभाओं में कहते रहे हैं कि पिछली सरकारों में कब्रिस्तान को पैसा दिया जाता था. बहरहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हर एक बयान और सियासी कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है.