अगर आप उत्तर प्रदेश में अपने सपनों का आशियाना या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है. उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) ने रियल एस्टेट से जुड़े नियमों को पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी बनाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. प्राधिकरण ने 13 जुलाई 2026 तक हुए सभी 12 संशोधनों को एक साथ मिलाकर उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (सामान्य) विनियम, 2019 को फिर से प्रकाशित किया है. इन नए समेकित (Consolidated) नियमों से अब बिल्डर्स, एजेंट्स और घर खरीदारों के लिए अधिकार और जिम्मेदारियां बिल्कुल साफ हो गई हैं.
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प्रोजेक्ट से जुड़े हर एक्सपर्ट की जानकारी होगी सार्वजनिक
अब बिल्डर यानी प्रमोटर को प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. इसके अलावा खरीदारों की सुविधा के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर (CRM) का नाम और संपर्क या टोल-फ्री नंबर देना अनिवार्य होगा. बिल्डर को हर तीन महीने में प्रोजेक्ट की क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) भी संबंधित विशेषज्ञों के प्रमाणपत्र के साथ जमा करनी होगी, जिससे खरीदारों को निर्माण की सही स्थिति का पता चलता रहे.
हर बदलाव पर वेबसाइट पर अपडेट होगी बिल्डर प्रोफाइल
हर बिल्डर को UP-RERA की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनानी होगी. नए प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन या कंपनी की जानकारी में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर इस प्रोफाइल को तुरंत अपडेट करना होगा. इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदार, ट्रस्टी, वित्तीय जानकारी और इनकम टैक्स रिटर्न जैसी जरूरी जानकारियां हमेशा अपडेट रखनी होंगी.
शिकायतों के लिए देने होंगे 4 अलग-अलग ई-मेल ID
बिल्डर को प्रशासनिक और उपभोक्ता कार्यों के लिए कुल चार अलग-अलग ई-मेल पते उपलब्ध कराने होंगे. इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, दूसरे प्रशासनिक काम, ग्राहक शिकायतों, आवंटियों और रियल एस्टेट एजेंट्स से संपर्क के लिए अलग-अलग ई-मेल शामिल होंगे. इससे जरूरी जानकारी या शिकायत गलत जगह जाने की संभावना कम होगी और मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा.
स्वीकृत नक्शे वाले नाम से ही जाना जाएगा प्रोजेक्ट
अक्सर देखा जाता है कि विज्ञापन में प्रोजेक्ट का नाम कुछ और होता है और नक्शे में कुछ और. अब बिल्डर को प्रोजेक्ट का वही नाम इस्तेमाल करना होगा, जो स्वीकृत नक्शे में दर्ज है. इससे खरीदार आसानी से समझ सकेंगे कि जिस प्रोजेक्ट की बुकिंग या बिक्री हो रही है, वह असल में उसी स्वीकृत प्रोजेक्ट से जुड़ा है या नहीं.
कब्जा देने के लिए 'Offer of Possession' का तय प्रारूप
जब भी बिल्डर किसी खरीदार को फ्लैट या मकान का कब्जा सौंपेगा, तो उसे UP-RERA द्वारा तय किए गए प्रारूप में ही Offer of Possession देना होगा. इस व्यवस्था से कब्जे के वक्त होने वाली पैसों की गड़बड़ी और हिसाब-किताब के विवादों में कमी आएगी.
अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स के खरीदार भी कर सकेंगे ऑनलाइन शिकायत
UP-RERA ने उन खरीदारों को भी बड़ी राहत दी है, जिन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट में घर खरीदा है जो प्राधिकरण में रजिस्टर्ड नहीं है. अब ऐसे खरीदार भी UP-RERA की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे और उन्हें भी रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदारों जैसा ही राहत मांगने का अधिकार मिलेगा. हालांकि, शिकायत दर्ज कराते समय प्रोजेक्ट और बिल्डर की कुछ अतिरिक्त जानकारियां देनी होंगी.
रिपोर्ट समय पर न जमा करने पर लगेगा भारी जुर्माना
अगर बिल्डर या एजेंट जरूरी रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करते हैं, तो उनसे तय लेट फीस वसूली जाएगी. इसके तहत QPR जमा करने में देरी पर 15 हजार सालाना ऑडिट रिपोर्ट देर से जमा करने पर 25 हजार और रियल एस्टेट एजेंट की तिमाही रिपोर्ट देर से जमा करने पर 10 हजार का शुल्क तय किया गया है.
परिवार में नाम ट्रांसफर पर सिर्फ 1000 का शुल्क
यदि किसी आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट या प्लॉट परिवार के ही किसी सदस्य के नाम ट्रांसफर होता है, तो इसके लिए सिर्फ 1000 का शुल्क लगेगा. वहीं परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति के नाम आवंटन ट्रांसफर होने पर यह शुल्क अधिकतम 25000 तक हो सकता है. इससे खरीदारों से मनमाना ट्रांसफर शुल्क वसूलने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
प्रोजेक्ट के लिए रखने होंगे 3 बैंक खाते और नकद पर रोक
प्रोजेक्ट के लिए बिल्डर को अब तीन अलग-अलग बैंक खाते रखने होंगे, जिनमें कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट शामिल हैं. खरीदारों से कलेक्शन अकाउंट में जमा होने वाली राशि का 70 प्रतिशत रोज सेपरेट अकाउंट और 30 प्रतिशत ट्रांजेक्शन अकाउंट में जाएगा. प्रोजेक्ट से जुड़े लोन की राशि सेपरेट अकाउंट में ही जमा होगी. हर वित्तीय वर्ष में इन खातों का ऑडिट कराकर रिपोर्ट UP-RERA की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी, और बिल्डर ग्राहकों से नकद राशि स्वीकार नहीं कर सकेगा.
विज्ञापन और ब्रोशर में छिपाई नहीं जा सकेगी कोई जानकारी
प्रोजेक्ट के विज्ञापन और ब्रोशर में अब सिर्फ आकर्षक दावे करना काफी नहीं होगा. बिल्डर और एजेंट को विज्ञापन में UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, वेबसाइट, QR कोड, कलेक्शन अकाउंट की जानकारी, प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख और एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर प्रमुखता से देना होगा, ताकि खरीदार विज्ञापन देखकर ही प्रोजेक्ट की सही जांच-परख कर सकें.
रियल एस्टेट एजेंट्स के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट अनिवार्य
रियल एस्टेट एजेंटों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए अब प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जरूरी कर दिया गया है. एजेंटों को अपने सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज व्यवस्थित रखने होंगे और हर तीन महीने में अपने लेन-देन की रिपोर्ट UP-RERA की आधिकारिक वेबसाइट पर जमा करनी होगी.
मेंटेनेंस फंड (IFMS) के पैसे का नहीं होगा गलत इस्तेमाल
रखरखाव के लिए खरीदारों से जमा कराई जाने वाली IFMS रकम को लेकर भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं. यह रकम अलग बैंक खाते में रखी जाएगी और जब कॉमन एरिया की जिम्मेदारी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को सौंपी जाएगी, तो IFMS का पूरा पैसा एसोसिएशन को ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इस पैसे का इस्तेमाल केवल कॉमन एरिया की सुविधाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए ही हो सकेगा और एसोसिएशन को इसका पूरा हिसाब रखकर ऑडिट कराना होगा.
संकट में फंसे प्रोजेक्ट्स के लिए बनाए गए स्पष्ट नियम
नए नियमों में यह भी साफ किया गया है कि किसी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन किन हालातों में बढ़ाया जा सकता है, कब वापस लिया जा सकता है और किन परिस्थितियों में प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसी दूसरे प्रमोटर को सौंपी जा सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य संकट में फंसे प्रोजेक्ट्स के खरीदारों के हितों की रक्षा करना और अटके हुए काम को दोबारा आगे बढ़ाना है.
प्राधिकरण की वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध हैं सभी नियम
UP-RERA के मुताबिक, सभी संशोधनों को मिलाकर तैयार किए गए ये सामान्य नियम प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट के लीगल सेक्शन में उपलब्ध करा दिए गए हैं. इससे बिल्डर, खरीदार और एजेंट सभी के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना आसान हो जाएगा.
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