यह कहानी उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के बखीरा थाना इलाके की है, जहां एक भाई को अपनी बहन-बेटियों की इज्जत की हिफाजत करने की इतनी भयानक कीमत चुकानी पड़ेगी, यह किसी ने सोचा भी नहीं था. महज एक हफ्ते पुराना विवाद, सब्जी मंडी का वो कोना और धारदार हथियार का वो जानलेवा वार... जिसने 26 साल के एक बेगुनाह दलित युवक आनंद की जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दी.
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मंडी से घर के लिए सब्जी खरीदने निकला आनंद फिर कभी लौटकर वापस नहीं आया. इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में खौफ का सन्नाटा पसरा हुआ है, तो वहीं गुस्साए परिजनों और भीम आर्मी के हंगामे के बाद पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका है.
शादी का घर और मनचलों की वो ओछी हरकत
वारदात की स्क्रिप्ट करीब एक हफ्ते पहले 6 जून को ही लिख दी गई थी. आनंद के घर में शादी का जश्न था, चारों तरफ खुशियों का माहौल था. परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान गांव का रहने वाला नासिर अली अपने कुछ साथियों के साथ वहां से गुजरा. शादी के घर के बाहर खड़ीं बहन-बेटियों को देखकर नासिर और उसके दोस्तों ने अश्लील इशारे और कमेंटबाजी शुरू कर दी.
घर की औरतों के साथ हो रही इस बदसलूकी को देखकर 26 साल के आनंद का खून खौल उठा. उसने आगे बढ़कर नासिर की इस ओछी हरकत का कड़ा विरोध किया. उस वक्त दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक और थोड़ी हाथापाई भी हुई, जिसके बाद मामला शांत करा दिया गया, लेकिन नासिर के दिल में बदले की आग सुलग रही थी.
सब्जी लेने गया था आनंद, नासिर ने रेत दिया गला
बीते दिन आनंद रोज की तरह बाजार में साग-सब्जी खरीदने गया था. उसे अंदाजा भी नहीं था कि नासिर अली अपने गुर्गों के साथ घात लगाए उसकी मौत का इंतजार कर रहा है. आरोप है कि जैसे ही आनंद मार्केट के एक सुनसान हिस्से में पहुंचा, नासिर और उसके साथियों ने उसे घेर लिया.
पुरानी रंजिश और सरेआम हुई बेइज्जती का बदला लेने के लिए नासिर ने धारदार हथियार निकाला और आनंद पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमला इतना बेरहम था कि आनंद को संभलने तक का मौका नहीं मिला. बीच सड़क पर खून से लथपथ आनंद तड़पता रहा और आरोपी वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए. अस्पताल ले जाते-जाते आनंद ने दम तोड़ दिया.
छावनी में बदला इलाका, उठी एनकाउंटर की मांग
आनंद की मौत की खबर फैलते ही बखीरा थाना क्षेत्र में तनाव फैल गया. पोस्टमार्टम हाउस के बाहर आनंद के रोते-बिलखते परिजन और भीम आर्मी के कार्यकर्ता जमा हो गए. लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. पीड़ित परिवार का साफ कहना था कि, "अगर हम अपनी बहन-बेटियों की हिफाजत के लिए आवाज उठाएंगे, तो क्या ये लोग हमारा गला काट देंगे? हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए और हत्यारे नासिर का एनकाउंटर होना चाहिए." आक्रोशित परिजनों ने तब तक अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया, जब तक सख्त कार्रवाई का भरोसा नहीं मिला.
आर्थिक की मदद और बुलडोजर की तैयारी
मामले की गंभीरता और बढ़ते बवाल को देखते हुए जिला प्रशासन और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया. अधिकारियों के काफी मान-मनौव्वल और कड़े आश्वासन के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ. प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है. मृतक के बच्चों के भरण-पोषण के लिए विशेष भत्ते का आश्वासन भी दिया गया है.
बुलडोजर एक्शन
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि मुख्य आरोपी नासिर अली के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई की प्रक्रिया (प्रचलित) शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी. गाजियाबाद के सूर्या चौहान हत्याकांड की याद दिलाने वाली इस वारदात ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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