UPPSC का रिजल्ट देखते ही पहुंच गए हनुमान मंदिर, फिर फूट-फूट कर रोए...जानिए कौन हैं ये शख्स!

Naib Tehsildar Success Story: UPPSC PCS 2024 रिजल्ट में नायब तहसीलदार बने आनंद राज की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां रिजल्ट देखते ही वह हनुमान मंदिर पहुंचे और भावुक होकर रो पड़े. गरीबी, पारिवारिक संकट और भाई की मौत जैसी कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. जानिए कैसे संघर्ष, साहित्य और मेहनत ने उन्हें सफलता तक पहुंचाया.

Naib Tehsildar Success Story
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गौरव कुमार पांडेय

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जब एक लंबा संघर्ष अपने मुकाम तक पहुंचता है, तो चेहरे पर मुस्कान से पहले आंखों में आंसू आते हैं. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के पीसीएस 2024 के परिणामों में कुछ ऐसी ही तस्वीर प्रयागराज से सामने आई है. नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुए आनंद राज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह रिजल्ट देखने के बाद सीधे हनुमान मंदिर पहुंचे और भगवान के चरणों में माथा टेक कर फूट-फूट कर रोने लगे.

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संघर्ष और आंसुओं के पीछे का दर्द

आनंद राज के ये आंसू सिर्फ सफलता की खुशी के नहीं थे, बल्कि उस कठिन दौर की यादों के थे जिसे उन्होंने और उनके परिवार ने सालों तक झेला है. एक बेहद सामान्य किसान परिवार से आने वाले आनंद के पिता खेती के साथ-साथ एक छोटी कंपनी में नौकरी भी करते थे ताकि बेटे की पढ़ाई जारी रह सके. आनंद प्रयागराज में रहकर तैयारी कर रहे थे, लेकिन नियति ने उनकी परीक्षा ली.

आज से करीब तीन साल पहले एक सड़क हादसे में आनंद ने अपने बड़े भाई को खो दिया, जो घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभाले हुए थे. भाई के जाने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया और आर्थिक संकट गहरा गया, लेकिन पिता की जिद थी कि आनंद अपनी पढ़ाई न छोड़ें.

लॉकडाउन का अकेलापन और साहित्य का सहारा

तैयारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा, तो आनंद के सामने अकेलापन और भविष्य की चिंताएं बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थीं. उस अंधेरे दौर में आनंद ने खुद को टूटने से बचाने के लिए साहित्य का सहारा लिया. उन्होंने सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध कविता 'राम की शक्ति पूजा' और मुंशी प्रेमचंद सहित कई महान लेखकों के लगभग 50 से 60 उपन्यास पढ़े. आनंद बताते हैं कि इन किताबों ने उन्हें उस खालीपन से बाहर निकाला और आगे बढ़ने के लिए जरूरी मोटिवेशन दिया. इसी साहित्य के प्रभाव ने उनके व्यक्तित्व और सोचने के नजरिए को बदलने में पुल का काम किया.

असफलता से सफलता तक का सफर

आनंद राज की स्कूली शिक्षा तो अच्छी रही, लेकिन उन्हें कोई बड़ा कॉलेज नहीं मिल पाया. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद के नोट्स बनाकर पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की. साल 2023 में उन्होंने अपना पहला प्रयास किया, जिसमें प्रीलिम्स तो निकल गया लेकिन मेंस की बाधा पार नहीं हो सकीय पहली बार मिली इस असफलता से निराश होने के बजाय आनंद ने अपनी कमियों पर काम किया और साल 2024 की परीक्षा में पूरी ताकत झोंक दी. जब रिजल्ट आया, तो आनंद का नाम नायब तहसीलदार की सूची में चमक रहा था.

पूरी पीढ़ी के संघर्ष का नतीजा

आनंद राज अपनी इस सफलता को सिर्फ अपनी मेहनत नहीं, बल्कि अपने पिता के त्याग और भाई के सपनों की जीत मानते हैं. मंदिर में उनका फूट-फूट कर रोना उन तमाम रातों के संघर्ष का जवाब था, जब गरीबी और दुख पढ़ाई के आड़े आ रहे थे. आज आनंद का पूरा परिवार इस ऐतिहासिक सफलता से बेहद खुश है. उनका मानना है कि भगवान हनुमान में अटूट विश्वास और ईमानदारी से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. अब आनंद राज समाज की सेवा करने और अपने परिवार के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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